मध्य प्रदेश में प्रशासनिक अधिकारियों को प्रमोशन, तीन जॉइंट कलेक्टर बने अपर कलेक्टर; पांच तहसीलदार-एसएलआर को डिप्टी कलेक्टर पद पर पदोन्नति
भोपाल। मध्य प्रदेश में लंबे समय से विभागीय जांच के कारण अटकी अधिकारियों की पदोन्नति प्रक्रिया को अब गति मिली है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने अलग-अलग आदेश जारी कर तीन जॉइंट कलेक्टरों को अपर कलेक्टर तथा पांच तहसीलदार-एसएलआर अधिकारियों को डिप्टी कलेक्टर के पद पर पदोन्नत किया है। विभागीय जांच में क्लीनचिट मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों को पदोन्नति का लाभ दिया गया है।
एक जनवरी 2026 से मानी जाएगी पदोन्नति
आदेश के अनुसार पदोन्नत अधिकारियों को 1 जनवरी 2026 से पदोन्नत माना जाएगा। हालांकि वेतन और भत्तों का वास्तविक आर्थिक लाभ जुलाई 2026 से मिलने की बात कही गई है। इसके साथ ही दो डिप्टी कलेक्टरों की लंबे समय से चल रही परिवीक्षाधीन अवधि समाप्त कर उन्हें नियमित डिप्टी कलेक्टर घोषित किया गया है।
तीन जॉइंट कलेक्टर बने अपर कलेक्टर
विभागीय जांच पूरी होने के बाद तीन जॉइंट कलेक्टरों को अपर कलेक्टर पद पर पदोन्नति दी गई है। इनमें भोपाल में संयुक्त कलेक्टर के रूप में पदस्थ रहे और वर्तमान में शिवपुरी में पदस्थ जेपी गुप्ता को अपर कलेक्टर बनाया गया है।
इसके अलावा मणींद्र कुमार सिंह को 1 जनवरी 2024 से 1 जनवरी 2026 तक का काल्पनिक वेतनमान देते हुए अपर कलेक्टर पद पर पदोन्नत किया गया है। विभागीय जांच के कारण उनकी पदोन्नति लंबित थी।
सेवानिवृत्त अधिकारी को भी पदोन्नति का लाभ
रिटायर्ड अधिकारी कौशल सिंह गौड़ को भी 1 जनवरी 2021 से सेवानिवृत्ति की तारीख 1 जनवरी 2024 तक काल्पनिक वेतनमान के साथ अपर कलेक्टर पद पर पदोन्नति दी गई है।
नौ साल बाद खत्म हुआ डिप्टी कलेक्टर का प्रोबेशन
बुरहानपुर में पदस्थापना के दौरान जमीन के रिकॉर्ड में हेरफेर के आरोपों से जुड़ी विभागीय जांच के कारण डिप्टी कलेक्टर विशा माधवानी का प्रोबेशन पीरियड करीब नौ साल बाद समाप्त किया गया। उन्होंने 13 दिसंबर 2017 को सेवा ज्वाइन की थी और उनका प्रोबेशन 2019 में पूरा होना था। जांच प्रक्रिया में देरी के कारण मामला लंबित रहा। अब उन्हें नियमित डिप्टी कलेक्टर घोषित किया गया है।
इसी तरह डिप्टी कलेक्टर राहुल सिलाडिया का भी प्रोबेशन पीरियड समाप्त कर उन्हें नियमित डिप्टी कलेक्टर घोषित किया गया है।
पांच तहसीलदार-एसएलआर बने डिप्टी कलेक्टर
जीएडी ने पांच एसएलआर और तहसीलदार स्तर के अधिकारियों को डिप्टी कलेक्टर पद पर पदोन्नत किया है। इनमें वैद्यनाथ वासनीक, विवेक गुप्ता, नवनीत कुमार शर्मा, नरेश चंद्र गुप्ता और संजय कुमार जैन शामिल हैं। विभागीय जांच के कारण इनकी पदोन्नति भी लंबे समय से लंबित थी।
इन अधिकारियों को क्रमशः 1 जनवरी 2018, 1 जनवरी 2019 और 1 जनवरी 2023 से काल्पनिक वेतनमान का लाभ दिया गया है। हालांकि वेतनमान का वास्तविक लाभ जीएडी के ताजा आदेश के बाद पदभार ग्रहण करने की तारीख से मिलेगा।
तीन डिप्टी कलेक्टर बने जॉइंट कलेक्टर
विभागीय जांच पूरी होने के बाद तीन डिप्टी कलेक्टरों को जॉइंट कलेक्टर पद पर पदोन्नति दी गई है। इनमें राकेश सिंह मरकाम, संतोष कुमार तिवारी और रविश कुमार श्रीवास्तव शामिल हैं।
इन अधिकारियों को क्रमशः 1 जनवरी 2018, 1 जनवरी 2019 और 1 जनवरी 2023 से काल्पनिक वेतनमान का लाभ दिया गया है। वास्तविक वेतनमान का लाभ पदभार ग्रहण करने की तारीख से मिलेगा।
मध्य प्रदेश में इससे पहले भी पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से लंबित मामलों पर कार्रवाई हुई है। जुलाई 2026 में जीएडी ने 190 तहसीलदारों और प्रभारी डिप्टी कलेक्टरों को डिप्टी कलेक्टर पद पर पदोन्नति दी थी।
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