मैहर में सरकारी अस्पताल के ब्लड फॉर्म के निजी अस्पताल में इस्तेमाल का आरोप, स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल

Aug 2, 2026 - 14:21
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मैहर में सरकारी अस्पताल के ब्लड फॉर्म के निजी अस्पताल में इस्तेमाल का आरोप, स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल

नागपुर मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में सिविल अस्पताल के ब्लड रिक्वायरमेंट फॉर्म के इस्तेमाल का मामला, जिला प्रशासन से जांच की मांग

मैहर। जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक मामला सामने आने के बाद सरकारी संसाधनों के उपयोग और विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि सिविल अस्पताल में इस्तेमाल होने वाला ब्लड रिक्वायरमेंट फॉर्म नागपुर मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में पहुंचा और वहां उसका उपयोग किया गया।

मामले के सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि सरकारी अस्पताल के लिए निर्धारित दस्तावेज निजी अस्पताल तक कैसे पहुंचा। यदि सरकारी दस्तावेज का निजी संस्थान में इस्तेमाल हुआ है तो इसे लेकर जिम्मेदारी भी तय किए जाने की मांग उठ रही है।

सरकारी दस्तावेज निजी अस्पताल तक कैसे पहुंचा?

बताया जा रहा है कि सिविल अस्पताल से संबंधित ब्लड रिक्वायरमेंट फॉर्म नागपुर मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। इसको लेकर विभागीय कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

मामले को लेकर पत्रकारों द्वारा सवाल किए जाने पर डॉ. विपिन सिंह के हवाले से सरकारी संपत्ति के उपयोग को लेकर बयान दिए जाने की बात कही गई है। इस कथित बयान के बाद मामला और चर्चा में आ गया है।

जिला प्रशासन से कार्रवाई की मांग

नागपुर मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल के संचालक ने मामले को गंभीर बताते हुए जिला प्रशासन से जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि स्वास्थ्य विभाग के सरकारी दस्तावेज और अन्य सामग्री के उपयोग की जांच की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं अन्य सरकारी संसाधनों का भी निजी कार्यों में इस्तेमाल तो नहीं किया जा रहा।

जांच के बाद साफ होगी तस्वीर

फिलहाल पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सिविल अस्पताल का ब्लड रिक्वायरमेंट फॉर्म निजी अस्पताल तक कैसे पहुंचा और इसका इस्तेमाल किसकी अनुमति से किया गया? मामले की निष्पक्ष जांच होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

यदि जांच में सरकारी दस्तावेज या संपत्ति के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों से जुड़े दस्तावेजों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत भी सामने आई है।

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