बाघों की बढ़ती संख्या पर गर्व, अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर वन विभाग ने निकाली जागरूकता रैली
रायसेन
रायसेन में अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर बुधवार को सामान्य वन मंडल रायसेन द्वारा जिला मुख्यालय पर 'राइड फॉर टाइगर' कार्यक्रम आयोजित किया गया। वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने बाइक रैली निकालकर लोगों को बाघ संरक्षण, वन सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। रैली का नेतृत्व डीएफओ प्रतिभा शुक्ला ने किया।
बाइक रैली से दिया संरक्षण का संदेश
जिला मुख्यालय से निकली बाइक रैली में वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। रैली के दौरान नागरिकों को जंगलों के संरक्षण, जैव विविधता बनाए रखने और वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। पूरे मार्ग में बाघ संरक्षण से जुड़े संदेशों के माध्यम से लोगों से प्रकृति संरक्षण में भागीदारी की अपील की गई।
बाघ हैं तो जंगल सुरक्षित हैं'
डीएफओ प्रतिभा शुक्ला ने कहा कि बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे तो बाघों का प्राकृतिक आवास भी सुरक्षित रहेगा और पर्यावरण का संतुलन बना रहेगा। उन्होंने नागरिकों से वन एवं वन्यजीव संरक्षण में सक्रिय सहयोग देने की अपील की।
रायसेन बना बाघों का मजबूत प्राकृतिक आवास
डीएफओ ने बताया कि रायसेन जिले के दोनों वन मंडलों में अब 100 से अधिक बाघों का मूवमेंट और अस्तित्व दर्ज किया जा रहा है। बाघों की लगातार बढ़ती संख्या रायसेन को मध्य प्रदेश के प्रमुख टाइगर लैंडस्केप के रूप में नई पहचान दिला रही है।
उन्होंने कहा कि जिले के घने जंगल, पर्याप्त जल स्रोत और अनुकूल प्राकृतिक वातावरण बाघों के लिए सुरक्षित आवास उपलब्ध कराते हैं। यही कारण है कि जिला मुख्यालय से लगे वन क्षेत्रों सहित कई इलाकों में समय-समय पर बाघों की मौजूदगी दर्ज की जाती है।
लगातार हो रही मॉनिटरिंग
वन विभाग के अनुसार बाघों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक आवास के संरक्षण के लिए नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। आधुनिक तकनीकों और मैदानी निगरानी के माध्यम से बाघों की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष को भी कम किया जा सके।
जनभागीदारी पर दिया जोर
कार्यक्रम के समापन पर वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने बाघ संरक्षण, वन संवर्धन और पर्यावरण सुरक्षा के लिए सामूहिक संकल्प लिया। विभाग का कहना है कि बाघों और जंगलों की समृद्ध विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए जनसहभागिता सबसे महत्वपूर्ण है।
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