भूखे पेट पढ़ने को मजबूर मासूम? आदिवासी अंचल के सरकारी स्कूल में मध्यान्ह भोजन योजना पर उठे सवाल

Jul 29, 2026 - 09:15
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भूखे पेट पढ़ने को मजबूर मासूम? आदिवासी अंचल के सरकारी स्कूल में मध्यान्ह भोजन योजना पर उठे सवाल
भूखे पेट पढ़ने को मजबूर मासूम? आदिवासी अंचल के सरकारी स्कूल में मध्यान्ह भोजन योजना पर उठे सवाल

मेन्यू में थी आलू की सब्जी, बच्चों की थाली से रही गायब; गैस होने के बावजूद नहीं बना भोजन, जिम्मेदारों के जवाब पर बढ़े सवाल

इछावर (सीहोर)।

सीहोर जिले के इछावर ब्लॉक के ब्रिजिशनगर संकुल केंद्र अंतर्गत शासकीय माध्यमिक विद्यालय लोह पठार में मध्याह्न भोजन योजना की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। एमपी विश्वास न्यूज की मीडिया टीम द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान मंगलवार को निर्धारित मेन्यू के अनुसार बच्चों को खीर, पूड़ी और आलू की सब्जी परोसी जानी थी, लेकिन मौके पर बच्चों की थाली में सब्जी नहीं मिली।

मीडिया टीम ने जब विद्यालय में मौजूद बच्चों से बातचीत की तो कई विद्यार्थियों ने बताया कि उन्हें कई बार भरपेट भोजन भी नहीं मिलता। बच्चों का कहना था कि अक्सर निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन नहीं दिया जाता और कई बार पर्याप्त रोटियां भी उपलब्ध नहीं कराई जातीं। यदि ये बातें सही हैं, तो यह मध्याह्न भोजन योजना के उद्देश्य और बच्चों के पोषण से जुड़ा गंभीर मामला बनता है।

इस संबंध में विद्यालय के जिम्मेदारों से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि बारिश के कारण लकड़ियां गीली हो गई थीं, जिससे चूल्हा नहीं जल पाया और आलू की सब्जी नहीं बन सकी।

हालांकि, जब मीडिया टीम ने पूछा कि शासन द्वारा रसोई गैस के लिए भी राशि उपलब्ध कराई जाती है, तो गैस पर भोजन क्यों नहीं बनाया गया, इस पर संबंधित जिम्मेदारों ने जवाब दिया कि "इस महीने से गैस पर खाना बनाया जाएगा।" इस जवाब ने व्यवस्था की कार्यप्रणाली और संसाधनों के उपयोग को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए।

मध्याह्न भोजन योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को पौष्टिक एवं संतुलित भोजन उपलब्ध कराना है ताकि उनके स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों को मजबूती मिले। ऐसे में मेन्यू का पालन नहीं होना और बच्चों द्वारा भोजन की गुणवत्ता व पर्याप्त मात्रा को लेकर शिकायतें सामने आना चिंताजनक है।

अब आवश्यकता है कि शिक्षा विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं, यह पता लगाएं कि निर्धारित मेन्यू का पालन क्यों नहीं हुआ और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। आदिवासी अंचल के बच्चों के पोषण और उनके अधिकारों से जुड़ा यह मामला गंभीर है, जिस पर प्रभावी निगरानी और जवाबदेही आवश्यक है।

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