भोपाल नगर निगम में लाखों का साइबर फ्रॉड: लोक अदालत के नाम पर काटीं फर्जी रसीदें, दो कर्मचारी गिरफ्तार

Jul 6, 2026 - 18:30
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भोपाल नगर निगम में लाखों का साइबर फ्रॉड: लोक अदालत के नाम पर काटीं फर्जी रसीदें, दो कर्मचारी गिरफ्तार

भोपाल।

भोपाल नगर निगम में सरकारी सिस्टम में सेंध लगाकर करीब 14.70 लाख रुपये के बड़े साइबर फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपियों ने नेशनल लोक अदालत का फायदा उठाकर वार्ड क्रमांक 33 के वार्ड प्रभारी की यूजर आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग करते हुए लाखों रुपये की फर्जी रसीदें जारी कर दीं। इस मामले में अरेरा हिल्स थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नगर निगम के दो कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक महिला कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका की गहन जांच की जा रही है।

लोक अदालत के दौरान हुआ फर्जीवाड़ा

मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम दिनों यानी 14 मार्च 2026 की है, जब नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया था। जालसाजों ने इस मौके का फायदा उठाया और वार्ड क्रमांक 33 के वार्ड प्रभारी रघुवीर तिवारी की यूजर आईडी और पासवर्ड की चोरी कर ली। इसके बाद, अलग-अलग वार्डों के संपत्ति कर और जलकर के नाम पर NEFT, RTGS और UPI के माध्यम से कुल 14,69,798 रुपये की 106 फर्जी रसीदें जनरेट कर दी गईं। जब नगर निगम ने अपने बैंक खातों की जांच की, तो पता चला कि यह राशि सरकारी खाते में आई ही नहीं थी।

वार्ड प्रभारी को ऐसे हुआ शक

वार्ड क्रमांक 33 के वार्ड प्रभारी रघुवीर तिवारी को जब पता चला कि उनकी लॉगिन आईडी से लाखों रुपये की रसीदें जारी हुई हैं, जबकि उन्होंने या उनके कंप्यूटर ऑपरेटर ने ऐसा कोई काम नहीं किया था, तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत जोनल अधिकारी (जोन क्र. 07) और निगम मुख्यालय को इसकी लिखित शिकायत दी। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर आयुक्त (राजस्व) आईएएस अंजू अरुण कुमार ने अरेरा हिल्स थाना प्रभारी को पत्र लिखकर तत्काल कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए।

निगम के दो कर्मचारी गिरफ्तार, महिला ऑपरेटर संदिग्ध

अपर आयुक्त के कड़े रुख के बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य जुटाए और मुस्तैदी से कार्रवाई करते हुए नगर निगम के दो कर्मचारियों को धर दबोचा। गिरफ्तार आरोपियों में वार्ड क्रमांक 24 का कंप्यूटर ऑपरेटर शिराज उल हक (निवासी शाहजहाँनाबाद) और योजना प्रकोष्ठ में पदस्थ लिपिक मोहम्मद समीर खान (निवासी अशोक विहार) शामिल हैं। इसके अलावा वार्ड क्रमांक 42 की कंप्यूटर ऑपरेटर नाहिद इसरार की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिसका नाम एफआईआर में दर्ज कर पुलिस जांच कर रही है।

आधे दाम में टैक्स जमा कराने का देते थे लालच

पुलिस जांच और बयानों में खुलासा हुआ है कि आरोपी शिराज उल हक और मोहम्मद समीर मिलकर प्रॉपर्टी धारकों को ठगने का नेटवर्क चला रहे थे। वे सीधे तौर पर प्रॉपर्टी मालिकों से संपर्क करते थे और उन्हें लालच देते थे कि 'जितना आपका टैक्स है, उससे आधी रकम में हम आपका पूरा टैक्स जमा करवा देंगे।' इस झांसे में आकर कई लोगों ने इन्हें पैसे दे दिए। इसके बाद आरोपियों ने शातिर तरीके से वार्ड क्रमांक 24 की कंप्यूटर ऑपरेटर नाहिद के जरिए धोखे से वार्ड 33 के प्रभारी का आईडी-पासवर्ड हासिल किया और फर्जी रसीदें काटकर सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी की।

सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल

इस बड़े घोटाले के बाद भोपाल नगर निगम की ऑनलाइन टैक्स कलेक्शन और रसीद प्रणाली की डिजिटल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक संवेदनशील सरकारी यूजर आईडी और पासवर्ड का इस तरह आसानी से दुरुपयोग कैसे हो गया?

अरेरा हिल्स थाना पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के बाद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब इस बात का पता लगा रही है कि इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए किस कंप्यूटर के IP एड्रेस का इस्तेमाल किया गया था और क्या इस पूरे खेल के पीछे कोई बड़ा संगठित सिंडिकेट या मास्टरमाइंड काम कर रहा है।

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