खाकी और सिस्टम की सुस्ती से 'केमिकल बम' बना मकान!
13 महीने से सील गोदाम में यूरिया रिसाव से नीवें कमज़ोर, 2.11 लाख हड़पकर आरोपी बेल पर बाहर!
* जनसुनवाई में कलेक्टर के सामने पेश हुआ पीड़ित मिथुन सैनी का दर्दनाक शिकायती पत्र, विस्फोटक अधिनियम और BNS के तहत कड़ी कार्रवाई की मांग
* सूखीसेवनिया पुलिस की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल: रासायनिक विस्फोट, गैस रिसाव या हादसे पर कौन होगा ज़िम्मेदार?
भोपाल।
राजधानी के सूखीसेवनिया थाना क्षेत्र (ग्राम श्यामपुर, सैनी चौराहा) में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनहीनता का एक ऐसा मामला सामने आया है, जहाँ एक पीड़ित मकान मालिक का पूरा परिवार 'केमिकल बम' के मुहाने पर जीने को मजबूर है।
अवैध यूरिया (DEF) का काला कारोबार करने वाले आरोपी जगदीश कुमार बसंतानी (निवासी- शांति नगर, बैरसिया रोड) पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर गोदाम सील तो कर दिया, लेकिन 13 महीने बीत जाने के बाद भी अंदर भरा रासायनिक यूरिया बाहर नहीं निकाला गया। नतीजा यह है कि गोदाम में रखे ज्वलनशील और जहरीले रसायनों से हो रहे रिसाव ने पूरे मकान की नींव और दीवारों को जर्जर कर दिया है।
मंगलवार को पीड़ित मिथुन सैनी पिता छोटेलाल सैनी ने कलेक्टर जनसुनवाई में लिखित आवेदन सौंपकर प्रशासनिक अमले की पोल खोल कर रख दी।
रुपये 2.11 लाख का चूना: ना किराया दिया, ना बिजली का बिल!
कलेक्टर को दिए गए आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, मिथुन सैनी ने अपना 1320 वर्ग फुट का गोदाम 5 दिसंबर 2024 को ₹15,000 प्रति माह के किराए पर 'जनरल स्टोर/गुड्स' के लिए दिया था। लेकिन शातिर आरोपी बसंतानी ने अनुबंध की धज्जियाँ उड़ाते हुए वहाँ अवैध केमिकल और नकली यूरिया रिपैकिंग का अड्डा बना लिया।
पीड़ित द्वारा प्रस्तुत बकाए का पूरा गणित:
* 13 महीने का बकाया किराया (जून 2025 से जुलाई 2026): ₹1,95,000
* मई 2025 का पुराना बकाया: ₹1,000
* मीटर का बढ़ता बिजली बिल (लगभग): ₹15,000
* कुल लेनदारी: ₹2,11,000 (दो लाख ग्यारह हजार रुपये)
पीड़ित का कहना है कि इसी गोदाम के किराए से उनके बच्चों की स्कूल फीस और घर का भरण-पोषण चलता था। आमदनी बंद होने से वे कर्ज में डूब चुके हैं और बैंक की किस्तें तक नहीं भर पा रहे हैं।
रिसाव से मकान क्षतिग्रस्त, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा!
पीड़ित ने बेहद भयानक स्थिति का खुलासा किया है। गोदाम के भीतर 13 महीनों से बंद पड़े यूरिया व रसायनों में केमिकल रिएक्शन शुरू हो चुका है। खतरनाक यूरिया दीवारों से बाहर रिस रहा है, जिससे मकान की दीवारें गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं।
आवेदन में उठाए गए सीधे सवाल
"यदि प्रशासनिक व पुलिसिया लापरवाही के कारण गोदाम के अंदर रासायनिक विस्फोट, आगजनी, गैस रिसाव या जनहानि जैसी कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसका पूर्ण दायित्व संबंधित अधिकारियों का होगा! क्या पुलिस किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रही है?"
अग्रिम जमानत पर बाहर आरोपी
छापेमारी के बाद महीनों फरार रहने वाला आरोपी बसंतानी हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत हासिल कर चुका है। थाना सूखीसेवनिया, एसडीओपी देहात और एसपी से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद पुलिस गोदाम से रसायन हटवाने में नाकाम रही है। पीड़ित का आरोप है कि आरोपी फोन पर शेखी बघारता है कि "पुलिस की कोई…, हमारी सब जगह सेटिंग है।" मिथुन सैनी के अनुसार उनके पास आरोपी की इस दबंगई की कॉल रिकॉर्डिंग भी मौजूद है।
पीड़ित की कलेक्टर से प्रमुख मांगें:
* बीएनएस (BNS), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1884 एवं उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत आरोपी पर अविलंब नई धाराओं में मामला दर्ज कर जांच हो।
* गोदाम में रखे खतरनाक यूरिया/रसायन को तत्काल आरोपी के भाई के पास स्थित गोदाम या अन्य सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए।
* संपत्ति को सीज मुक्त कराकर मूल मालिक को सौंपा जाए और ₹2,11,000 का बकाया किराया व बिजली बिल दिलवाया जाए।
* रसायन के रिसाव से क्षतिग्रस्त हुई दीवारों का तत्काल पुलिस बल की मौजूदगी में निरीक्षण करवाया जाए।
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