अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस: बाघ बचाने के दावों के बीच जंगल उजड़ने का आरोप, उमंग सिंघार ने सरकार से पूछे सवाल

Jul 28, 2026 - 23:13
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अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस: बाघ बचाने के दावों के बीच जंगल उजड़ने का आरोप, उमंग सिंघार ने सरकार से पूछे सवाल

भोपाल,

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर बाघ संरक्षण के नाम पर विरोधाभासी नीति अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार स्वयं को "टाइगर स्टेट" बताकर बाघ संरक्षण का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर विकास परियोजनाओं के नाम पर बाघों के प्राकृतिक आवास और वन्यजीव गलियारों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। 

सिंघार ने कहा कि केवल बाघों की संख्या बढ़ाना ही संरक्षण नहीं है, बल्कि उनके जंगल, प्राकृतिक गलियारे और आवास सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। उनका आरोप है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना, भोपाल पश्चिमी बाईपास, सड़क एवं रेल परियोजनाएं तथा वन क्षेत्रों में बढ़ते भूमि कारोबार से बाघों के आवास प्रभावित हो रहे हैं। 

उन्होंने केन-बेतवा लिंक परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे पन्ना टाइगर रिजर्व के महत्वपूर्ण वन क्षेत्र के डूबने, लाखों पेड़ों की कटाई और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास के विखंडन की आशंका जताई गई है। वहीं भोपाल पश्चिमी बाईपास परियोजना को लेकर भी उन्होंने वन्यजीव गलियारे पर प्रभाव और भूमि खरीद से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की। 

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि किसी परियोजना से बाघ गलियारे प्रभावित होते हैं तो उसके वैज्ञानिक अध्ययन, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और निर्णय प्रक्रिया सार्वजनिक की जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए बिना वास्तविक बाघ संरक्षण संभव नहीं है। 

सिंघार ने केन-बेतवा परियोजना, भोपाल पश्चिमी बाईपास और अन्य संवेदनशील परियोजनाओं से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों तथा भूमि सौदों के आरोपों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। 

उन्होंने कहा कि बाघ केवल जंगल की शान नहीं बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की जीवनरेखा हैं। यदि जंगल सुरक्षित नहीं रहेंगे तो नदियां, जल स्रोत, जैव विविधता और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी संकट में पड़ जाएगा। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर केवल बाघों की संख्या नहीं, बल्कि विकास परियोजनाओं की पर्यावरणीय जिम्मेदारी और पारदर्शिता पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। 

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