रामसर साइट 'भोज वेटलैंड' पर भू-माफियाओं का महा-फर्जीवाड़ा* बड़ा तालाब के FTL ज़ोन में रसूखदारों के 'अवैध' किलों पर*रामसर साइट 'भोज वेटलैंड' पर भू-माफियाओं का महा-फर्जीवाड़ा*
बड़ा तालाब के FTL ज़ोन में रसूखदारों के 'अवैध' किलों पर गरजा प्रशासन का पीला पंजा; 5 तरह की फर्जी मुनारें गाड़कर खड़ा किया था साम्राज्य
एनजीटी में 21 बड़े अतिक्रमणों की 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (ATR) पेश होते ही बिशनखेड़ी और गौरागांव में हड़कंप; शनिवार को 6 आलीशान फार्म हाउस जमींदोज, 3 सरकारी सर्वे की दफन रिपोर्टों और 8 साल के massive-fraud-by-land-mafias-at-the-ramsar-site-bhoj-wetland-illegal-fortresses-built-by-influential-figures-in-the-ftl-zone-of-bada-talabकाले गठजोड़ का पर्दाफाश
भोपाल।
राजधानी की जीवनदायिनी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित रामसर साइट घोषित 'बड़ा तालाब' को निगल रहे रसूखदारों, सफेदपोशों और भू-माफियाओं के अवैध साम्राज्य पर आखिरकार प्रशासन का भारी क्रेन और बुलडोजर चल ही गया। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में नगर निगम द्वारा 24 घंटे पहले सौंपी गई गोपनीय 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (ATR) के बाद शनिवार अलसुबह समूचा प्रशासनिक अमला भारी पुलिस बल के साथ वीआईपी इलाकों के मैदान में उतर गया।
निगम उपायुक्त भुवन गुप्ता, टीटी नगर एसडीएम अर्चना शर्मा और तहसीलदार कुणाल राउत के कड़े नेतृत्व में निगम की बिल्डिंग शाखा ने बिशनखेड़ी, गौरागांव, सेवनिया गौंड और प्रेमपुरा क्षेत्रों में घेराबंदी कर डिमोलिशन ड्राइव का आगाज किया। शनिवार देर शाम तक फुल टैंक लेवल (FTL) के 50 मीटर के प्रतिबंधित दायरे में बने 6 आलीशान और अवैध फार्म हाउसों को पूरी तरह ध्वस्त कर मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया गया। इन अवैध निर्माणों के पास किसी भी प्रकार की बिल्डिंग परमिशन या वैध दस्तावेज नहीं थे।
5 तरह की फर्जी मुनारों का खेल
पड़ताल के मुताबिक, बड़ा तालाब के किनारों पर सालों से एक संगठित भू-माफिया नेटवर्क सक्रिय है। इन माफियाओं ने कम दामों पर आलीशान लेक-व्यू प्लॉट बेचने का झांसा देकर न केवल आम जनता को ठगा, बल्कि सरकारी जमीनों की सीमाओं को ही गायब कर दिया। जांच में सामने आया कि मौके पर FTL सीमा तय करने वाली 5 अलग-अलग प्रकार की मुनारें (सीमा स्तंभ) धंसी हुई मिलीं। इनमें से केवल एक पर प्रामाणिक रूप से 'BMC' (भोपाल म्युनिसिपल कॉरपोरेशन) अंकित है, जबकि बाकी 4 मुनारें फर्जी हैं, जिन पर सिर्फ सफेद रंग पोता गया है ताकि अवैध कब्जों को कानूनी संरक्षण का भ्रम दिया जा सके।
21 में से 18 निर्माण नए: सर्वे में चिन्हित 21 बड़े अतिक्रमणों में से केवल 3 निर्माण साल 2022 के पहले के हैं, जबकि 18 निर्माण 2022 के बाद यानी जिम्मेदार अफसरों की साठगांठ से हाल ही में तान दिए गए।
सुस्त चाल: इस साल 5 फरवरी से शुरू हुए अभियान में 37 दिनों के भीतर 347 अतिक्रमण चिन्हित हुए थे, लेकिन प्रशासनिक शिथिलता के कारण केवल 51 छोटे कब्जे ही हटाए जा सके थे। अभी भी 296 बड़े कब्जे रडार पर हैं।
फाइलों में दफन रहा सर्वे का इतिहास
तालाब के सीमांकन को लेकर भोपाल नगर निगम और झील संरक्षण प्राधिकरण के पिछले 10 साल का इतिहास केवल जांच और ठंडे बस्ते का रहा है। अधिकारियों की लापरवाही के चलते तीन बार बड़े स्तर पर सर्वे कराए गए, लेकिन उनकी अंतिम रिपोर्ट को जानबूझकर सार्वजनिक नहीं होने दिया गया।
साल 2016 का DGPS सर्वे: नगर निगम ने करोड़ों रुपये खर्च कर जमीन के सटीक माप की आधुनिक तकनीक 'DGPS' से सर्वे कराया था। इसमें तालाब का वास्तविक कैचमेंट एरिया 38.72 वर्ग किमी दर्ज हुआ था। इस रिपोर्ट में तालाब के FTL के सटीक को-ऑर्डिनेट्स दर्ज थे, जिससे निजी और सरकारी जमीन का दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता था, लेकिन यह रिपोर्ट आज तक फाइलों से बाहर नहीं आई।
मुनार गायब होने का खेल: एनजीटी के निर्देश पर जब मुनारों की गिनती हुई, तब 943 में से 141 मुनारें मौके से पूरी तरह गायब पाई गईं और 337 पानी में डूबी थीं। मुनारों को दोबारा स्थापित करने की हिम्मत किसी भी अधिकारी ने रसूखदारों के दबाव में नहीं दिखाई।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी मज़ाक
हाल ही में देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के कड़े रुख के बाद जिला प्रशासन ने मप्र झील संरक्षण प्राधिकरण के साथ मिलकर एक और सर्वे पूरा किया था। सूत्रों के अनुसार, यह पूरी रिपोर्ट एक मोबाइल ऐप पर तो दर्ज कर दी गई, लेकिन इसे आज तक किसी भी सरकारी गजट या आधिकारिक दस्तावेज का हिस्सा नहीं बनाया गया। गरजा प्रशासन का पीला पंजा; 5 तरह की फर्जी मुनारें गाड़कर खड़ा किया था साम्राज्य
एनजीटी में 21 बड़े अतिक्रमणों की 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (ATR) पेश होते ही बिशनखेड़ी और गौरागांव में हड़कंप; शनिवार को 6 आलीशान फार्म हाउस जमींदोज, 3 सरकारी सर्वे की दफन रिपोर्टों और 8 साल के काले गठजोड़ का पर्दाफाश
भोपाल।
राजधानी की जीवनदायिनी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित रामसर साइट घोषित 'बड़ा तालाब' को निगल रहे रसूखदारों, सफेदपोशों और भू-माफियाओं के अवैध साम्राज्य पर आखिरकार प्रशासन का भारी क्रेन और बुलडोजर चल ही गया। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में नगर निगम द्वारा 24 घंटे पहले सौंपी गई गोपनीय 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (ATR) के बाद शनिवार अलसुबह समूचा प्रशासनिक अमला भारी पुलिस बल के साथ वीआईपी इलाकों के मैदान में उतर गया।
निगम उपायुक्त भुवन गुप्ता, टीटी नगर एसडीएम अर्चना शर्मा और तहसीलदार कुणाल राउत के कड़े नेतृत्व में निगम की बिल्डिंग शाखा ने बिशनखेड़ी, गौरागांव, सेवनिया गौंड और प्रेमपुरा क्षेत्रों में घेराबंदी कर डिमोलिशन ड्राइव का आगाज किया। शनिवार देर शाम तक फुल टैंक लेवल (FTL) के 50 मीटर के प्रतिबंधित दायरे में बने 6 आलीशान और अवैध फार्म हाउसों को पूरी तरह ध्वस्त कर मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया गया। इन अवैध निर्माणों के पास किसी भी प्रकार की बिल्डिंग परमिशन या वैध दस्तावेज नहीं थे।
5 तरह की फर्जी मुनारों का खेल
हिंदुस्तान मेल की विशेष पड़ताल के मुताबिक, बड़ा तालाब के किनारों पर सालों से एक संगठित भू-माफिया नेटवर्क सक्रिय है। इन माफियाओं ने कम दामों पर आलीशान लेक-व्यू प्लॉट बेचने का झांसा देकर न केवल आम जनता को ठगा, बल्कि सरकारी जमीनों की सीमाओं को ही गायब कर दिया। जांच में सामने आया कि मौके पर FTL सीमा तय करने वाली 5 अलग-अलग प्रकार की मुनारें (सीमा स्तंभ) धंसी हुई मिलीं। इनमें से केवल एक पर प्रामाणिक रूप से 'BMC' (भोपाल म्युनिसिपल कॉरपोरेशन) अंकित है, जबकि बाकी 4 मुनारें फर्जी हैं, जिन पर सिर्फ सफेद रंग पोता गया है ताकि अवैध कब्जों को कानूनी संरक्षण का भ्रम दिया जा सके।
21 में से 18 निर्माण नए: सर्वे में चिन्हित 21 बड़े अतिक्रमणों में से केवल 3 निर्माण साल 2022 के पहले के हैं, जबकि 18 निर्माण 2022 के बाद यानी जिम्मेदार अफसरों की साठगांठ से हाल ही में तान दिए गए।
सुस्त चाल: इस साल 5 फरवरी से शुरू हुए अभियान में 37 दिनों के भीतर 347 अतिक्रमण चिन्हित हुए थे, लेकिन प्रशासनिक शिथिलता के कारण केवल 51 छोटे कब्जे ही हटाए जा सके थे। अभी भी 296 बड़े कब्जे रडार पर हैं।
फाइलों में दफन रहा सर्वे का इतिहास
तालाब के सीमांकन को लेकर भोपाल नगर निगम और झील संरक्षण प्राधिकरण के पिछले 10 साल का इतिहास केवल जांच और ठंडे बस्ते का रहा है। अधिकारियों की लापरवाही के चलते तीन बार बड़े स्तर पर सर्वे कराए गए, लेकिन उनकी अंतिम रिपोर्ट को जानबूझकर सार्वजनिक नहीं होने दिया गया।
साल 2016 का DGPS सर्वे: नगर निगम ने करोड़ों रुपये खर्च कर जमीन के सटीक माप की आधुनिक तकनीक 'DGPS' से सर्वे कराया था। इसमें तालाब का वास्तविक कैचमेंट एरिया 38.72 वर्ग किमी दर्ज हुआ था। इस रिपोर्ट में तालाब के FTL के सटीक को-ऑर्डिनेट्स दर्ज थे, जिससे निजी और सरकारी जमीन का दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता था, लेकिन यह रिपोर्ट आज तक फाइलों से बाहर नहीं आई।
मुनार गायब होने का खेल: एनजीटी के निर्देश पर जब मुनारों की गिनती हुई, तब 943 में से 141 मुनारें मौके से पूरी तरह गायब पाई गईं और 337 पानी में डूबी थीं। मुनारों को दोबारा स्थापित करने की हिम्मत किसी भी अधिकारी ने रसूखदारों के दबाव में नहीं दिखाई।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी मज़ाक
हाल ही में देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के कड़े रुख के बाद जिला प्रशासन ने मप्र झील संरक्षण प्राधिकरण के साथ मिलकर एक और सर्वे पूरा किया था। सूत्रों के अनुसार, यह पूरी रिपोर्ट एक मोबाइल ऐप पर तो दर्ज कर दी गई, लेकिन इसे आज तक किसी भी सरकारी गजट या आधिकारिक दस्तावेज का हिस्सा नहीं बनाया गया।
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