मंत्री प्रतिमा बागरी की छानबीन समिति के सामने 'अग्निपरीक्षा'
मंत्री प्रतिमा बागरी की कुर्सी पर संकट के बादल! जाति प्रमाण पत्र मामले में आज स्क्रूटनी कमेटी के सामने होंगी पेश
भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में 'जाति' को लेकर एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। इस बार निशाने पर सीधे सूबे की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी हैं, जिनकी कुर्सी पर अब संकट की तलवार लटक गई है। फर्जी जाति प्रमाण पत्र के गंभीर आरोपों से घिरीं मंत्री बागरी को आज सोमवार को राज्य स्तरीय छानबीन समिति (स्क्रूटनी कमेटी) के कटघरे में पेश होना होगा। राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरज़ोर चर्चा है कि इस बार मंत्री महोदया को कोई राहत नहीं मिलने वाली और उन्हें बहुत बड़ा झटका लग सकता है।
'फैमिली ट्री' का दांव पड़ेगा उलटा, नहीं काम आएगा पुराना रसूख
छानबीन समिति के सामने खुद को बेदाग साबित करने के लिए मंत्री बागरी का खेमा 'फैमिली ट्री' और पुराने इतिहास को ढाल बनाने की जुगत में है। दलील दी जा रही है कि उनके परिवार के लोग पहले भी इसी जाति के आधार पर आरक्षित सीटों से विधायक और मंत्री पद का मलाईदार सुख भोग चुके हैं। लेकिन कानून के जानकारों का साफ कहना है कि चोरी चाहे पुरानी हो या नई, शिकायत होने पर पकड़ी ही जाती है। इस बार चूंकि बागरी के खिलाफ सीधे साक्ष्यों के साथ शिकायत आई है, इसलिए छानबीन समिति सिर्फ कागजी सबूतों और नियमों के तराजू पर ही फैसला तोलेगी, किसी पुराने रसूख पर नहीं।
क्या है पूरा 'जाति का खेल'?
कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने इस पूरे मामले की कलई खोलते हुए सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अहिरवार की याचिका में सीधा और गंभीर आरोप लगाया गया है कि प्रतिमा बागरी जिस क्षेत्र से आती हैं, वहां उनकी मूल जाति अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के दायरे में आती ही नहीं है। आरोप है कि चुनाव जीतने और मंत्री पद हथियाने के लिए जो अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया, वह पूरी तरह अवैध और फर्जी है।
30 दिन का अल्टीमेटम
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया और प्रशासन को महज 30 दिनों के भीतर इस 'जाति विवाद' का दूध का दूध और पानी का पानी करने का कड़ा आदेश दे डाला।
प्रशासन ने बजवाई डोंडी, क्या आज टल जाएगी पेशी?
हाईकोर्ट के इस हंटर के बाद सहमे जिला प्रशासन ने आनन-फानन में कार्रवाई शुरू की और मंत्री के चुनाव क्षेत्र में बाकायदा दो-दो बार डोंडी (मुनादी) पिटवाकर दस्तावेज और सबूत पेश करने का अल्टीमेटम दिया।
अब सबकी निगाहें आज सोमवार को होने वाली स्क्रूटनी कमेटी की बैठक पर टिकी हैं। सूत्रों का कहना है कि अगर मंत्री बागरी के पास अपनी जाति को सही साबित करने का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं मिला, तो उनके राजनीतिक करियर पर पूर्णविराम लग सकता है। हालांकि, अपनी साख बचाने और समय काटने के लिए बागरी खेमे की तरफ से इस सुनवाई को आगे टालने की पूरी बिसात बिछाई जा रही है।
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