श्री महालक्ष्मी देवालय स्थापना महोत्सव: करूणाधाम में त्रिदिवसीय सार्वभौम दिग्विजय महायज्ञ संपन्न, मां महालक्ष्मी की भव्य आरती हुई
भोपाल |
राजधानी भोपाल के नेहरू नगर स्थित करूणाधाम आश्रम में पीठाधीश्वर गुरुदेव श्री सुदेश जी शांडिल्य महाराज के सानिध्य में आयोजित श्री महालक्ष्मी देवालय स्थापना महोत्सव के अंतर्गत तीन दिवसीय सार्वभौम दिग्विजय महायज्ञ पूर्णाहुति के साथ संपन्न हो गया। समापन अवसर पर मां महालक्ष्मी की भव्य एवं दिव्य आरती की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
23 जुलाई से शुरू हुए इस महायज्ञ का आयोजन विश्व शांति, मानव कल्याण, सामाजिक समरसता और सनातन वैदिक परंपराओं के संरक्षण की भावना के साथ किया गया। महायज्ञ के दौरान 5108 वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ गौ-घृत से विशेष आहुतियां अर्पित की गईं।
वैदिक परंपरा के अनुरूप हुए विविध अनुष्ठान
महायज्ञ के प्रथम दिन पंचांग पूजन, जल यात्रा, अश्व पूजन, मंडप प्रवेश, चतुषष्ठी योगिनी मंडल, भद्र मंडल, ग्रह मंडल और रुद्र मंडल की स्थापना के साथ अरणी मंथन द्वारा अग्नि प्रज्वलित की गई।
दूसरे दिन शुक्ल यजुर्वेद के मंत्रों के साथ वाजपेय, राजसूय, सौत्रामणि एवं रुद्र सूक्त के मंत्रों से यज्ञ संपन्न हुआ। शाम को तुरीय संगीत और सितार वादन की मनमोहक प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव कराया।
अश्व शोभायात्रा बनी आकर्षण का केंद्र
महायज्ञ के अंतिम दिन ब्राह्मण पूजन एवं अश्वमेध मंत्रों के साथ विशेष आहुतियां दी गईं। इसके बाद पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार अश्व शोभायात्रा निकाली गई। यजमान का वैदिक विधि-विधान से स्वागत, द्वार पूजन, नृत्य प्रस्तुतियां, मंगल वाद्य और धर्मदंड प्रदान करने की रस्में संपन्न हुईं। अंत में पूर्णाहुति के साथ मां महालक्ष्मी की भव्य आरती कर महोत्सव का विधिवत समापन किया गया।
आयोजन के दौरान गुरुदेव श्री सुदेश जी शांडिल्य महाराज ने कहा कि सनातन वैदिक परंपरा में यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि विश्व कल्याण, सामाजिक समरसता और मानवता के उत्थान का माध्यम हैं। महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर सुख-समृद्धि और विश्व शांति की कामना की।
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