जेपी अस्पताल से 21 कर्मचारियों की छुट्टी, 20-25 साल से सेवा दे रहे कर्मियों ने उठाए सवाल
भोपाल।
राजधानी के जयप्रकाश जिला चिकित्सालय (जेपी अस्पताल) में जिला रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) के माध्यम से कार्यरत 21 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। लंबे समय से अस्पताल में कार्यरत कर्मचारियों ने इस कार्रवाई को मनमाना और नियमों के विपरीत बताते हुए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।
22 जुलाई 2026 को सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक एवं जिला रोगी कल्याण समिति के सचिव द्वारा जारी आदेश में स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय और लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के निर्देशों के पालन का हवाला देते हुए कार्यकारिणी समिति के निर्णय के आधार पर कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने की बात कही गई है।
20 से 25 वर्षों से दे रहे थे सेवाएं
सेवामुक्त कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले 20 से 25 वर्षों से आरकेएस के माध्यम से जेपी अस्पताल में कंप्यूटर ऑपरेटर, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, वाहन चालक, टिकट राइटर, सफाईकर्मी, माली सहित विभिन्न पदों पर कार्यरत थे और अस्पताल की व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा रहे हैं।
'बिना नोटिस हटाया गया'
प्रभावित कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि सेवा समाप्त करने से पहले उन्हें न तो कारण बताओ नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर मिला। उनका कहना है कि 22 जुलाई को कार्यकारिणी समिति की बैठक हुई और उसी दिन तत्काल प्रभाव से सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
2019 के आदेश की गलत व्याख्या का आरोप
कर्मचारियों का कहना है कि सेवा समाप्ति के आदेश में 18 जुलाई 2019 के स्वास्थ्य संचालनालय के आदेश का हवाला दिया गया है, जबकि उस आदेश में केवल नई नियुक्तियों पर रोक का प्रावधान है। उनका दावा है कि उनकी नियुक्तियां वर्ष 2019 से कई वर्ष पहले तत्कालीन नियमों एवं कलेक्टर दर के प्रावधानों के तहत हुई थीं, इसलिए पुराने कर्मचारियों पर उक्त आदेश को पूर्व प्रभाव से लागू करना उचित नहीं है।
स्वास्थ्य मंत्री से लगाई गुहार
सेवामुक्त कर्मचारियों ने स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन सौंपकर सेवा समाप्ति आदेश की निष्पक्ष जांच कराने, 18 जुलाई 2019 के आदेश की सही व्याख्या लागू करने तथा वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों की सेवाएं बहाल करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया तो उनके सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
वहीं, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों और जिला रोगी कल्याण समिति की कार्यकारिणी के निर्णय के अनुरूप की गई है। फिलहाल मामले में कर्मचारियों और प्रशासन के अपने-अपने दावे हैं।
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