पंचमुखी पशुपतिनाथ भगवान की प्राण प्रतिष्ठा पर निकली भव्य कलश यात्रा
भोपाल। गीता नगर, भानपुर स्थित रामेश्वरम मंदिर में पंचमुखी पशुपतिनाथ भगवान शिव की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर भव्य कलश यात्रा निकाली गई। यात्रा में बजरंग हम्माल श्रमिक संघ के प्रदेश अध्यक्ष एवं श्री हिन्दू उत्सव समिति भोपाल के महामंत्री बालिस्ता रावत विशेष रूप से शामिल हुए।
कलश यात्रा रामेश्वरम मंदिर परिसर से शुरू होकर भानपुर चौराहा, पटेल मार्केट और बिहारी कॉलोनी होते हुए वापस मंदिर परिसर पहुंची। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक उत्साह के साथ भाग लिया। मंदिर पहुंचने के बाद वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ पंचमुखी पशुपतिनाथ भगवान शिव की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराई गई। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण किया गया।
बालिस्ता रावत ने बताया पशुपतिनाथ स्वरूप का महत्व
रामेश्वरम मंदिर के पुजारी सूरज शर्मा ने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में यह कलश यात्रा आयोजित की गई थी। उन्होंने बताया कि धार्मिक अनुष्ठानों के साथ भगवान पशुपतिनाथ की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई।
कार्यक्रम में बालिस्ता रावत ने भगवान पशुपतिनाथ के स्वरूप का धार्मिक महत्व बताते हुए कहा कि संस्कृत में ‘पशु’ शब्द का अर्थ केवल जानवर नहीं है। शास्त्रों में उस जीव को भी ‘पशु’ कहा गया है, जो अज्ञान, मोह, अहंकार और माया के बंधनों में बंधा हुआ है। ‘पति’ का अर्थ स्वामी या रक्षक तथा ‘नाथ’ का अर्थ मालिक माना जाता है। इस प्रकार भगवान पशुपतिनाथ को समस्त जीवों का स्वामी एवं रक्षक माना जाता है।
धार्मिक आयोजनों से मजबूत होती है सामाजिक एकता
बालिस्ता रावत ने कहा कि नेपाल के काठमांडू में बागमती नदी के किनारे स्थित पशुपतिनाथ मंदिर और मध्यप्रदेश के मंदसौर स्थित पशुपतिनाथ मंदिर भगवान शिव के प्रमुख प्रसिद्ध मंदिरों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की आराधना सनातन संस्कृति की महत्वपूर्ण परंपरा है।
उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में आध्यात्मिक चेतना और धार्मिक आस्था को बढ़ावा मिलता है। साथ ही धार्मिक कार्यक्रम सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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