गधे के नाम पर भी जारी हुआ नर्सिंग सर्टिफिकेट
हाई कोर्ट की सख्ती और CBI जांच के बाद भी नहीं थम रहा फर्जीवाड़ा!
भोपाल।
मध्य प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा को लेकर छिड़ा विवाद अब एक ऐसी शर्मनाक और हास्यास्पद दहलीज पर पहुंच चुका है, जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की होगी। हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणियों और सीबीआई की ताबड़तोड़ जांच के दावों के बीच मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल (MPNRC) की साख की धज्जियां उड़ गई हैं। काउंसिल का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सिस्टम किस कदर अंधेरगर्दी का शिकार है, इसका भंडाफोड़ तब हुआ जब फर्जी कागजातों के सहारे एक 'गधे' के नाम से बाकायदा सरकारी नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी हो गया।
तस्वीर गधे की, नाम 'DONKEY MPNRC': फीस कटते ही जनरेट हुआ लाइसेंस!
काउंसिल के सुरक्षा दावों की जमीनी हकीकत परखने के लिए एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने एक अनूठा स्टिंग/परीक्षण किया। उन्होंने पोर्टल पर जाकर एक ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरा।
* आवेदक का नाम: DONKEY MPNRC
* पिता का नाम: DONKEY FATHER
* अपलोड फोटो: इंसानी चेहरे की जगह एक 'गधे' की तस्वीर
* शैक्षणिक योग्यता: बिना किसी वास्तविक प्रमाणिकता वाले फर्जी दस्तावेज
आवेदन पूरा कर जैसे ही निर्धारित फीस जमा की गई, सिस्टम ने बिना किसी मैनुअल चेकिंग या दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन के सीधे डिजिटल हस्ताक्षरित पंजीयन प्रमाण-पत्र (Registration No. AI-74561, DII-73911) जारी कर दिया। यही नहीं, इस फर्जी सर्टिफिकेट की वैधता 2031 तक दर्ज कर दी गई है।
मरीजों की जान से खिलवाड़, कौन संभालेगा अस्पताल?
नर्सिंग सर्टिफिकेट कोई मामूली कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि अस्पतालों में भर्ती गंभीर मरीजों की जिंदगी बचाने का अधिकृत अधिकार पत्र है। अगर बिना जांच-परख के किसी गधे की फोटो पर रजिस्ट्रेशन जारी हो सकता है, तो कल को कोई भी मुन्नाभाई फर्जी कागजों के दम पर किसी भी अस्पताल में नर्स बनकर मरीजों का इलाज करने लगेगा।
"हमने काउंसिल के ढर्रे को बेनकाब करने के लिए यह परीक्षण किया था। जब गधे के नाम से सर्टिफिकेट बन सकता है, तो साफ है कि फर्जीवाड़े को रोकने के लिए बनी व्यवस्था खुद फर्जीवाड़े की सबसे बड़ी पोषक बनी हुई है।"
— रवि परमार, प्रदेश उपाध्यक्ष (NSUI)
अधिकारियों पर कब गिरेगी गाज? उठी उच्चस्तरीय जांच की मांग
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने काउंसिल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे फर्जीवाड़े की स्वतंत्र तकनीकी और प्रशासनिक जांच कराई जाए तथा दोषी अधिकारियों के नाम सार्वजनिक कर उन पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।
व्यापमं से लेकर नर्सिंग घोटाले तक की मार झेल चुके मध्य प्रदेश में अब 'गधे के नर्सिंग सर्टिफिकेट' ने प्रशासनिक ढर्रे पर ऐसा करारा तमाचा जड़ा है, जिसका जवाब देते स्वास्थ्य विभाग और काउंसिल के बड़े-बड़े अफसरों के पसीने छूट रहे हैं।
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