सिविल जज भर्ती में LLM को वकालत के बराबर नहीं माना जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

Aug 22, 2026 - 13:02
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सिविल जज भर्ती में LLM को वकालत के बराबर नहीं माना जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली, 

 सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की भर्ती को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि कानून में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री यानी LLM को अदालत में वकालत के व्यावहारिक अनुभव के बराबर नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि केवल उच्च कानूनी शिक्षा हासिल कर लेना न्यायिक सेवा में प्रवेश के लिए जरूरी व्यावहारिक अनुभव की जगह नहीं ले सकता।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की तीन सदस्यीय पीठ ने 20 मई 2025 के फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। मई 2025 के फैसले में निचली न्यायिक सेवा में सीधे प्रवेश के लिए वकालत के अनुभव की शर्त बहाल की गई थी।

31 मार्च 2027 तक मिलेगी संक्रमणकालीन राहत

सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि वकालत की अनिवार्यता लागू करने के तरीके में बदलाव किया है। 20 मई 2025 से 31 मार्च 2027 के बीच जारी होने वाली सिविल जज भर्ती अधिसूचनाओं में लॉ ग्रेजुएट्स तीन साल की वकालत पूरी किए बिना आवेदन कर सकेंगे।

इन भर्तियों में चयनित उम्मीदवारों को एक साल राज्य न्यायिक अकादमी में प्रशिक्षण और इसके बाद एक साल की संरचित लॉ क्लर्कशिप करनी होगी। इन दोनों वर्षों को निर्धारित उद्देश्य के लिए वकालत के अनुभव के बराबर माना जाएगा।

1 अप्रैल 2027 से बदल जाएगा नियम

सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक 1 अप्रैल 2027 या उसके बाद जारी होने वाली भर्ती अधिसूचनाओं के लिए उम्मीदवार को सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा में शामिल होने से पहले कम से कम एक साल का वास्तविक वकालत का अनुभव होना जरूरी होगा।

कोर्ट ने इस बात को बरकरार रखा है कि न्यायिक सेवा में प्रवेश करने वाले उम्मीदवारों के लिए अदालतों की कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव महत्वपूर्ण है। हालांकि, संक्रमणकालीन व्यवस्था के जरिए उन कानून स्नातकों को राहत दी गई है, जो पहले से चली आ रही व्यवस्था के तहत न्यायिक सेवा की तैयारी कर रहे थे।

फैसला 2:1 के बहुमत से हुआ। जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने फैसले के इस हिस्से पर असहमति जताई।

क्या बदला?

LLM/कानून की पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री को वकालत के बराबर नहीं माना गया।

31 मार्च 2027 तक जारी भर्ती में तीन साल की पूर्व वकालत की शर्त से राहत।

चयन के बाद एक साल न्यायिक अकादमी प्रशिक्षण और एक साल लॉ क्लर्कशिप।

1 अप्रैल 2027 से जारी भर्ती के लिए परीक्षा से पहले कम से कम एक साल की वास्तविक वकालत जरूरी होगी।

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