पैसे दोगुने करने का झांसा देकर 2 करोड़ की ठगी, अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश

Aug 27, 2026 - 19:42
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पैसे दोगुने करने का झांसा देकर 2 करोड़ की ठगी, अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश

35 दिन की कार्रवाई में 14 आरोपी गिरफ्तार, 1.73 करोड़ नकद सहित 2.92 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त

भोपाल, 27 अगस्त। पैसे दोगुने करने और बड़े मुनाफे का लालच देकर करीब 2 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का राजगढ़ पुलिस ने पर्दाफाश किया है। ऑपरेशन मनी ट्रेप के तहत पुलिस ने 35 दिनों तक लगातार कार्रवाई करते हुए 10 राज्यों में करीब 30 हजार किलोमीटर तक आरोपियों का पीछा किया। इस दौरान 3 हजार से अधिक सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण कर 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के कब्जे से 1 करोड़ 73 लाख रुपये नकद, चार चार पहिया वाहन और 19 एंड्रॉयड मोबाइल समेत करीब 2 करोड़ 92 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की गई है।

पुलिस के अनुसार, ब्यावरा निवासी फरियादी ने 24 जुलाई को थाना ब्यावरा शहर में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोपियों ने खुद को एक बड़ी कंपनी से जुड़े लोगों का परिचित बताते हुए निवेश की रकम दोगुनी करने का झांसा दिया था। फर्जी ई-मेल, दस्तावेज और भुगतान संबंधी संदेश दिखाकर फरियादी को विश्वास में लिया गया और 2 करोड़ रुपये निवेश करने पर अधिक राशि वापस करने का लालच दिया गया।

आरोपियों ने भोपाल में फरियादी से 2 करोड़ रुपये नकद लिए। इसके बाद हवाला और आंगड़िया के माध्यम से रकम भेजने की बात कहते हुए 4 करोड़ रुपये के आरटीजीएस का फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाया। रकम वापस नहीं मिलने पर फरियादी को ठगी का पता चला।

10 राज्यों में दबिश, 3 हजार सीसीटीवी खंगाले

मामले की गंभीरता को देखते हुए राजगढ़ पुलिस अधीक्षक ने 10 विशेष टीमों का गठन किया। टीमों ने आरोपियों के मूवमेंट और नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने के लिए 3 हजार से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले। पुलिस ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा समेत 10 राज्यों में दबिश देकर 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया।

जांच में सामने आया कि गिरोह सुनियोजित तरीके से कई स्तरों पर काम करता था। आरोपी बड़ी कंपनियों के नाम का इस्तेमाल, महंगी गाड़ियों और होटलों में बैठक तथा फर्जी दस्तावेजों के जरिए लोगों का भरोसा जीतते थे। रकम मिलने के बाद उसे हवाला और आंगड़िया नेटवर्क के जरिए अलग-अलग शहरों में भेजा जाता था। इसके बाद आरोपी रकम बांटकर अपने मोबाइल नंबर, ठिकाने और शहर बदल देते थे।

ट्रेड नाम से करते थे संपर्क

गिरोह की खास कार्यप्रणाली यह थी कि आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए वास्तविक नाम के बजाय ट्रेड नामों का इस्तेमाल करते थे। नेटवर्क में प्रत्येक व्यक्ति आमतौर पर अपने ऊपर और नीचे की लिंक से ही संपर्क रखता था, जिससे किसी एक आरोपी को पूरे नेटवर्क की जानकारी नहीं होती थी।

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के कुछ सदस्य कंपनी कर्मचारी और एजेंट बनकर पीड़ितों से संपर्क करते थे, जबकि अन्य खुद को कंपनी के चार्टर्ड अकाउंटेंट, डायरेक्टर और अन्य प्रतिनिधि बताकर निवेश योजना को विश्वसनीय साबित करते थे। भोपाल और ब्यावरा के होटलों में बैठकें कर फरियादी को निवेश के लिए तैयार किया गया था।

पुलिस के मुताबिक, भोपाल के जहांगीराबाद स्थित एक कोरियर कार्यालय में फरियादी से 2 करोड़ रुपये नकद लिए गए। रकम लेने के बाद आरोपियों ने 4 करोड़ रुपये के आरटीजीएस का फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाया और मौके से फरार हो गए।

इंदौर में भी ठगी की थी तैयारी

विवेचना में पता चला कि गिरोह ने इंदौर में भी इसी तरह की धोखाधड़ी की योजना बनाई थी, लेकिन राजगढ़ पुलिस की कार्रवाई के चलते उसे अंजाम नहीं दिया जा सका। प्रारंभिक जांच में पश्चिम बंगाल में करीब 50 लाख रुपये तथा दिल्ली में एक पुलिस अधिकारी से भी करीब 50 लाख रुपये की ठगी किए जाने की जानकारी सामने आई है।

गिरोह से जुड़े लोगों के कार्यालय उदयपुर, पश्चिम बंगाल, इंदौर, भोपाल, दिल्ली और मुंबई समेत कई स्थानों पर संचालित होने की जानकारी मिली है। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, फर्जी कंपनियों, ई-मेल, हवाला-आंगड़िया नेटवर्क और बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है। जब्त मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तकनीकी जांच भी जारी है।

कई राज्यों की पुलिस ने किया सहयोग

कार्रवाई में राजगढ़ पुलिस की विशेष टीमों के साथ मुंबई, नांदेड़, लातूर, भदोही, पुणे, हैदराबाद, केरल, तेलंगाना और भोपाल सहित विभिन्न स्थानों की पुलिस इकाइयों ने महत्वपूर्ण सहयोग किया।

मध्यप्रदेश पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कम समय में पैसा दोगुना करने, अत्यधिक लाभ देने या किसी बड़ी कंपनी के नाम पर निवेश का लालच देने वाले लोगों पर भरोसा न करें। निवेश से पहले संबंधित कंपनी, व्यक्ति और योजना का आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचना दें।

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