अनूपपुर में अध्यापक संघ ने खोला मोर्चा, मांगे पूरी न होने पर दी आंदोलन की चेतावनी
रिपोर्ट--- आकाश नामदेव
अनूपपुर
मध्यप्रदेश में अध्यापक एवं शिक्षक संवर्ग की वर्षों से लंबित पड़ी मांगों और समस्याओं को लेकर एक बार फिर कर्मचारियों का असंतोष सड़कों पर दिखने लगा है। इसी क्रम में ‘आजाद अध्यापक शिक्षक संघ’ (अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा), जिला शाखा अनूपपुर के तत्वावधान में शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन पत्र जिला कलेक्टर अनूपपुर को सौंपा। शिक्षकों ने अपनी 5 सूत्रीय प्रमुख मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की पुरजोर अपील की है।
शिक्षक संघ के अनुसार, संयुक्त मोर्चा द्वारा सौंपे गए इस ज्ञापन में पहली और सबसे प्रमुख मांग यह रखी गई है कि वर्तमान में सेवारत शिक्षकों को टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता से पूर्णतः मुक्त रखा जाना चाहिए। शिक्षकों का तर्क है कि वे पहले से ही कई वर्षों से अपनी सेवाएं सफलतापूर्वक दे रहे हैं, ऐसे में उन पर इस प्रकार की परीक्षा का दबाव बनाना न्यायसंगत नहीं है।
ज्ञापन का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण बिंदु शिक्षकों की पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य लाभों से संबंधित है। संघ ने मांग की है कि अध्यापक शिक्षक संवर्ग की सेवा अवधि की गणना उनकी ‘प्रथम नियुक्ति दिनांक’ से ही की जानी चाहिए। यदि प्रथम नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता मानी जाती है, तो शिक्षकों को पेंशन, ग्रेच्युटी और अर्जित अवकाशों के नगदीकरण का पूर्ण लाभ मिल सकेगा, जिससे उनके भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
तीसरी प्रमुख मांग के रूप में शिक्षकों ने वर्तमान में लागू की गई ई-अटेंडेंस प्रणाली का कड़ा विरोध जताया है। मोर्चे के पदाधिकारियों ने इसे पूरी तरह ‘अव्यवहारिक’ करार देते हुए अविलंब बंद करने की मांग की है। शिक्षकों का कहना है कि दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या तथा अन्य व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण इस व्यवस्था से पठन-पाठन का माहौल प्रभावित हो रहा है।
इसके अलावा, ज्ञापन में पूर्व में किए गए आंदोलनों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े लंबित मामलों को भी प्रमुखता से उठाया गया है। शिक्षकों ने सितंबर 2022 की हड़ताल अवधि के रोके गए वेतन के तत्काल भुगतान की मांग की है। साथ ही, लंबे समय से अटके पड़े क्रमोन्नति और समयमान वेतनमान के आदेश अविलंब जारी करने का आग्रह किया है ताकि योग्य शिक्षकों को उनका वित्तीय अधिकार मिल सके।
अनूपपुर जिले के संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधियों ने ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट किया कि यदि शासन प्रशासन द्वारा उनकी इन जायज और न्यायोचित मांगों पर शीघ्रता से सहानुभूतिपूर्वक विचार कर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो शिक्षक संवर्ग उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा। इस दौरान ज्ञापन सौंपने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में जिले के कई प्रमुख शिक्षक नेता एवं अध्यापक उपस्थित रहे।
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