रायसेन में पटवारी अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल पर, पांच सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन
रायसेन।
मध्य प्रदेश पटवारी संघ के आह्वान पर रायसेन जिले में सोमवार 3 अगस्त से पटवारियों की अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल शुरू हो गई है। जिला मुख्यालय स्थित तहसील कार्यालय परिसर में जिलेभर के पटवारी धरने पर बैठ गए हैं। जिले के करीब 500 पटवारी हड़ताल में शामिल हैं, जिसके चलते नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन सहित अन्य राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित होने लगे हैं और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हड़ताल के दौरान पटवारियों ने अपनी पांच सूत्रीय मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। आंदोलन के पहले चरण में पटवारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। अब मांगों का निराकरण नहीं होने पर अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी गई है।
जिला पटवारी संघ के अध्यक्ष गोविंद सिंह ने बताया कि पटवारी संवर्ग वर्षों से अपनी लंबित मांगों के समाधान के लिए शासन स्तर पर प्रयास कर रहा है। मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान पटवारी महाधिवेशन आयोजित कर समस्याओं के निराकरण का आश्वासन मिला था, लेकिन अब तक न तो महाधिवेशन की तिथि घोषित की गई और न ही किसी मांग पर निर्णय लिया गया। इससे प्रदेशभर का पटवारी संवर्ग स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहा है।
पटवारी संघ की प्रमुख मांगों में कैडर रिव्यू लागू कर पदोन्नति एवं समयमान वेतनमान का लाभ, नायब तहसीलदार की विभागीय परीक्षा शीघ्र आयोजित करना, पटवारियों को जज प्रोटेक्शन एक्ट के दायरे में शामिल करना, विभिन्न शासकीय योजनाओं के वर्षों से लंबित मानदेय का भुगतान, तथा संघ के पदाधिकारियों के कथित नियम विरुद्ध किए गए स्थानांतरण निरस्त करना शामिल हैं। संघ का कहना है कि विभागीय परीक्षा वर्ष 2018 के बाद आयोजित नहीं हुई है, जबकि कई योजनाओं का मानदेय भी अब तक लंबित है।
संघ का आरोप है कि अन्य विभागों के कर्मचारियों को नियमित पदोन्नति का लाभ मिल रहा है, जबकि पटवारी संवर्ग को वर्षों से इससे वंचित रखा गया है। साथ ही राजस्व न्यायालयों से जुड़े मामलों में पटवारियों पर सीधे एफआईआर दर्ज होने की घटनाओं को देखते हुए उन्हें भी जज प्रोटेक्शन एक्ट का संरक्षण दिए जाने की मांग की गई है।
पटवारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो प्रदेशभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संघ का कहना है कि मांगों के समाधान तक आंदोलन जारी रहेगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
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