भोपाल के काजी कैंप में मेट्रो निर्माण को लेकर विरोध, दुकान-मकान टूटने से व्यापारियों और रहवासियों में आक्रोश
80 साल पुरानी दुकानों और मकानों के प्रभावित होने का दावा, कम मुआवजे को लेकर उठे सवाल; बोले- विकास के विरोधी नहीं, रोजी-रोटी और घर बचाने की लड़ाई
भोपाल।
राजधानी भोपाल के पुराने शहर स्थित काजी कैंप इलाके में मेट्रो स्टेशन और कॉरिडोर निर्माण को लेकर प्रभावित दुकानदारों और रहवासियों का विरोध सामने आया है। सोमवार से इलाके में दुकानों और मकानों को हटाने तथा तोड़ने की कार्रवाई शुरू होने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई है।
कार्रवाई से प्रभावित व्यापारियों और रहवासियों ने अपनी दुकानों और मकानों के बाहर विरोध के पोस्टर और बैनर लगाए हैं। उनका कहना है कि वे विकास कार्य के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन मेट्रो परियोजना के लिए उनके वर्षों पुराने कारोबार और आशियाने प्रभावित हो रहे हैं, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी और पुनर्वास की गंभीर चिंता खड़ी हो गई है।
80 साल पुरानी दुकानों-मकानों के प्रभावित होने का दावा
स्थानीय व्यापारियों का दावा है कि काजी कैंप क्षेत्र में कई दुकानें और मकान दशकों पुराने हैं। कुछ व्यापारियों के मुताबिक उनकी करीब 80 साल पुरानी दुकानें और संपत्तियां भी मेट्रो परियोजना की जद में आ रही हैं। उनका कहना है कि इन दुकानों से परिवारों की कई पीढ़ियों की आजीविका जुड़ी रही है।
मुआवजे की राशि को लेकर नाराजगी
प्रभावित लोगों का आरोप है कि उन्हें संपत्ति और कारोबार के नुकसान की तुलना में बेहद कम मुआवजा दिया गया है। कुछ दुकानदारों ने दावा किया कि उन्हें करीब 1 से 1.5 लाख रुपये तक का मुआवजा मिला है। व्यापारियों का कहना है कि इतनी राशि में नया कारोबार शुरू करना और परिवार की आजीविका को दोबारा खड़ा करना बेहद मुश्किल है।
‘विकास का विरोध नहीं, घर और रोजगार बचाने की मांग’
स्थानीय लोगों का कहना है कि भोपाल में मेट्रो जैसी बड़ी परियोजना शहर के विकास के लिए जरूरी है, लेकिन इसके साथ प्रभावित परिवारों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि उनकी मांग उचित मुआवजा और प्रभावित दुकानदारों व रहवासियों के लिए उचित व्यवस्था किए जाने की है।
कारोबार उजड़ने से परिवार चलाने की चिंता
दुकानदारों के मुताबिक उनकी दुकानें हटने से वर्षों से चला आ रहा कारोबार अचानक खत्म हो जाएगा। कई परिवारों की आय इन्हीं दुकानों पर निर्भर है। व्यापारियों का कहना है कि कारोबार दोबारा स्थापित करने के लिए पर्याप्त सहायता नहीं मिलने पर परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो सकता है।
पीढ़ियों पुराने घर टूटने से भावुक हुए रहवासी
रहवासियों का कहना है कि काजी कैंप क्षेत्र में कई परिवार पीढ़ियों से रह रहे हैं। ऐसे में घरों के टूटने की कार्रवाई से लोगों में भावनात्मक पीड़ा भी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इलाके में इस समय गम और चिंता का माहौल है।
आगे भी कार्रवाई की आशंका
स्थानीय लोगों के अनुसार अंडरग्राउंड मेट्रो और ब्लू लाइन कॉरिडोर के दायरे में आने वाली अन्य पुरानी इमारतों पर भी आने वाले दिनों में कार्रवाई की आशंका है। इससे प्रभावित परिवारों की चिंता और बढ़ गई है।
प्रभावित व्यापारियों और रहवासियों का कहना है कि उन्होंने मेट्रो अधिकारियों से अपनी समस्याओं को लेकर स्पष्ट जानकारी और समाधान की मांग की है, लेकिन उन्हें अब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। लोगों ने प्रशासन और मेट्रो प्रबंधन से मांग की है कि कार्रवाई से पहले प्रभावित परिवारों की समस्याओं का उचित समाधान किया जाए और मुआवजे व पुनर्वास को लेकर स्पष्ट व्यवस्था की जाए।
हालांकि, मुआवजे की राशि और कार्रवाई से जुड़े स्थानीय लोगों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। मेट्रो अथॉरिटी या प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।
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