शहडोल की बेबस विधवा की संदिग्ध मौत: 75 साल की शांति बाई का करोड़ों का घर, 5 लाख सालाना पेंशन और फिर खामोश अंतिम संस्कार!

Oct 25, 2026 - 21:55
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शहडोल की बेबस विधवा की संदिग्ध मौत: 75 साल की शांति बाई का करोड़ों का घर, 5 लाख सालाना पेंशन और फिर खामोश अंतिम संस्कार!

रिपोर्ट----- आकाश नामदेव 

*देवरानी ने फूट-फूटकर कहा - "जेठानी के गहने गायब, घर में खड़ी हो गई चार पहिया गाड़ियों की फौज" | 

परिजनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए सनसनीखेज आरोप, एसपी से हत्या और साक्ष्य मिटाने की FIR की मांग

शहडोल।

 रेलवे के सेवानिवृत्त लोको पायलट स्व. देवी सिंह की 75 वर्षीय निःसंतान, अनपढ़ विधवा शांति बाई की मौत अब सिर्फ मौत नहीं, एक बड़ा सवाल बन गई है। सगी देवरानी सुशीला हरी सिंह और पुत्रवधू हरूना विक्रम सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जो दस्तावेज रखे, उसने पूरे जिले को झकझोर दिया।

*एक ही आंगन, दो घर और करोड़ों की जायदाद*

परिजनों ने बताया - स्व. देवी सिंह और स्व. हरी सिंह सगे भाई थे। पुरानी बस्ती में एक ही परिसर में दोनों के घर हैं। आगे मुख्य गेट से लगा हरी सिंह का घर और पीछे करोड़ों का सर्वसुविधायुक्त पक्का मकान देवी सिंह का। पति की मौत के बाद शांति बाई ही इस पूरी अचल संपत्ति की एकमात्र वारिस बची थीं।

*पेंशन 5 लाख सालाना, फिर भी दो कमरों में बदतर जिंदगी*

रेलवे से हर महीने 30-40 हजार यानी सालाना करीब 5 लाख पेंशन आती थी, फिर भी 75 साल की बुजुर्ग को दो कमरों में रखा गया। परिजनों का आरोप है - एक कमरे में जहां शंकर जी की पूजा होती थी, वहीं शांति बाई को सुलाया जाता था और बगल के कमरे में शकीला और सबीर खान का परिवार रहता था।

 गहने गायब, देखरेख के नाम पर 81 लाख की वसूली

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुशीला हरी सिंह ने बिलखते हुए कहा - "मेरी जेठानी के सारे सोने-चांदी के गहने, घर-गृहस्थी का सामान गायब है।"

आरोप है कि 2009 के कथित वसीयतनामा के नाम पर हर साल 4.48 लाख वसूले गए। हिसाब लगाएं तो 17 साल में करीब 81 लाख रुपये। परिजनों का सवाल है - इतना पैसा गया कहां? आशंका है कि इसी पैसे से बच्चियों की पढ़ाई, शादियां और चार पहिया गाड़ियों का काफिला खड़ा किया गया।

*अगर मौत सामान्य थी तो इतनी जल्दबाजी क्यों?*

परिजनों का सबसे तीखा सवाल - अगर सब कुछ वैध था, तो बिना पोस्टमार्टम, बिना सगे परिजनों को बताए, इतनी गोपनीयता से अंतिम संस्कार क्यों कर दिया गया?

महाराष्ट्र से फोन पर मिन्नतें करने के बावजूद अंतिम दर्शन तक नहीं करने दिया गया। 11 अक्टूबर 2026 को ही समाजसेवियों ने फोन पर एसपी और सीएसपी शहडोल को सूचना दे दी थी, लेकिन ट्रेन सुविधा न होने से परिजनों को कटनी होकर आने में 2-3 दिन लगे और इसी बीच सब कुछ खत्म कर दिया गया।

*कोतवाली पुलिस पर गंभीर आरोप - हत्या की आशंका पर सिर्फ NCR?*

परिजनों में भारी आक्रोश है कि हत्या और फर्जी दस्तावेज की आशंका के बावजूद कोतवाली पुलिस ने गंभीर धाराओं में FIR दर्ज करने के बजाय सिर्फ NCR काटकर खानापूर्ति कर दी।

 NCR नहीं, हत्या, कूटरचना और साक्ष्य मिटाने की FIR हो

सुशीला हरी सिंह और हरूना विक्रम सिंह ने मुख्यमंत्री, DGP और IG शहडोल से मांग की है कि NCR को तुरंत हत्या, फर्जी दस्तावेज (कूटरचना) और साक्ष्य विलोपन की धाराओं में बदलकर शकीला, सबीर खान और अंतिम संस्कार में शामिल सभी संदिग्धों को गिरफ्तार किया जाए।

*परिजनों ने कहा - ये सिर्फ संपत्ति का मामला नहीं, एक बेबस विधवा के आंसुओं का सवाल है। प्रशासन चुप रहा तो किसी की भी मां सुरक्षित नहीं।*

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