नौरोजाबाद वेस्ट कालरी में ‘संडे’ का काला खेल! हर रविवार बिक रहा है मजदूर का हक?
ड्यूटी लिस्ट में सेटिंग-गेटिंग का आरोप, जीएम क्यों है मौन ?*
रिपोर्ट----आकाश नामदेव
उमरिया।
कोयले की काली कमाई के बीच नौरोजाबाद वेस्ट कालरी में एक और काला खेल चर्चा में है - नाम है ‘संडे की बिक्री’!
सूत्रों की मानें तो यहाँ रविवार की ड्यूटी भगवान भरोसे नहीं, सेटिंग भरोसे बंटती है। जिसकी पहुँच, उसका संडे पक्का और जिसकी जेब गरम, उसकी ड्यूटी डन! कालरी के अंदर ही अंदर मजदूरों में कानाफूसी तेज है कि संडे ड्यूटी का रेट फिक्स है और लिस्ट बनने से पहले ही सौदा हो जाता है।
*हर संडे पर सवाल - ड्यूटी किसको, क्यों?*
नियम कहता है - ड्यूटी रोस्टर से, बारी-बारी से। लेकिन जमीन पर कहानी कुछ और ही सुनाई दे रही है। आरोप है कि मनपसंद लोगों को हर संडे पर ड्यूटी दे दी जाती है, तो किसी को महीने तक नंबर ही नहीं आता। ड्यूटी चार्ट कब बनता है, किसने बनाया, किस आधार पर - इसका कोई बोर्ड नहीं लगता। बस लिस्ट चिपकती है और मजदूर देखते रह जाते हैं।
*कुर्सी पर बैठे साहब को खबर नहीं?*
सबसे बड़ा सवाल - इस पूरे खेल पर महाप्रबंधक (जीएम) की नजर क्यों नहीं? कालरी की हर ड्यूटी, हर हाजिरी, हर संडे की निगरानी की जिम्मेदारी जीएम दफ्तर की है। फिर रोज उठ रही इन चर्चाओं पर चुप्पी क्यों?
क्या जीएम दफ्तर में ड्यूटी रजिस्टर की कभी ऑडिट हुई? क्या किसी मजदूर की शिकायत पर आज तक जांच बैठी? अगर सब कुछ पाक-साफ है तो प्रबंधन सामने आकर रोस्टर, हाजिरी और संडे ड्यूटी का हिसाब क्यों नहीं दिखा देता?
हमारा हक कौन खा रहा है?
कोयला निकालने वाला मजदूर पसीना बहाता है, लेकिन संडे का अतिरिक्त भत्ता किसी और की जेब में? अगर ये चर्चा सच है तो ये सीधा-सीधा मजदूर के हक पर डाका है।
फिलहाल ये चर्चाएं हैं, आरोप नहीं। लेकिन चर्चाएं इतनी तेज हैं कि धुआं तो है, अब आग कहां है ये जीएम साहब को बताना होगा।
SECL प्रबंधन अगर अब भी नहीं जागा, तो ये ‘संडे की बिक्री’ वाला खेल एक दिन बड़ा बवाल बन सकता है। मजदूर इंतजार में है - साहब बोलेंगे या फाइलों में ही दबा रह जाएगा ये पूरा मामला?
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