सीए के संरक्षण का कानून बनाने का मुद्दा लोकसभा में उठा
सांसद आलोक शर्मा ने नियम 377 के तहत सरकार से की प्रभावी कानूनी संरक्षण की मांग
भोपाल,
अकाउंटेंट्स (सीए) को क्लाइंट विवादों के चलते होने वाले कथित अनावश्यक पुलिस उत्पीड़न से संरक्षण देने के लिए प्रभावी कानूनी व्यवस्था बनाने की मांग भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने लोकसभा में उठाई। बुधवार को उन्होंने नियम 377 के तहत यह मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार का ध्यान सीए समुदाय की समस्याओं की ओर आकर्षित किया।
सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंट देश की अर्थव्यवस्था, कर व्यवस्था, वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद कई बार क्लाइंट और सीए के बीच विवाद होने पर, सीए की प्रत्यक्ष गलती नहीं होने के बावजूद उन्हें पुलिस पूछताछ और कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में सीए को थाने बुलाकर घंटों बैठाने या मानसिक दबाव बनाने की शिकायतें सामने आती हैं। सीए आमतौर पर क्लाइंट द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और सूचनाओं के आधार पर अपना पेशेवर कार्य करते हैं। ऐसे में यदि क्लाइंट ने गलत तथ्य या दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं, तो बिना निष्पक्ष जांच के उसकी जिम्मेदारी सीए पर डालना उचित नहीं है।
कार्रवाई से पहले हो निष्पक्ष जांच
आलोक शर्मा ने मांग की कि किसी सीए के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले उसकी वास्तविक भूमिका, जानकारी और जिम्मेदारी की निष्पक्ष जांच की जाए। पुलिस एवं जांच एजेंसियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाएं, ताकि केवल पेशेवर संबंध या क्लाइंट विवाद के आधार पर सीए को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए।
उन्होंने कहा कि जांच में सहयोग करने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को सम्मानजनक तरीके से और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही पूछताछ के लिए बुलाया जाना चाहिए। निर्दोष सीए को अनावश्यक मानसिक और पेशेवर उत्पीड़न से बचाने के लिए स्पष्ट एवं प्रभावी कानूनी संरक्षण आवश्यक है।
संसद के दोनों सदनों में उठ चुका है मुद्दा
लोकसभा में यह विषय 12 अगस्त 2026 को नियम 377 के अंतर्गत सूचीबद्ध मामलों में तीसरे क्रम पर था। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा नियम 377 के मामलों को सभा पटल पर रखने के आदेश दिए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा भी चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए संरक्षण कानून बनाए जाने की आवश्यकता का मुद्दा राज्यसभा में उठा चुके हैं। इस तरह सीए समुदाय से जुड़ी यह मांग संसद के दोनों सदनों में उठाई जा चुकी है।
सांसद आलोक शर्मा ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि सीए के पेशेवर दायित्वों को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट कानूनी संरक्षण, जांच की निर्धारित प्रक्रिया और पुलिस-प्रशासन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश तैयार किए जाएं, ताकि वास्तविक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो और निर्दोष पेशेवरों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
What's Your Reaction?