भोपाल में सीलिंग अभियान को लेकर बवाल: 7 प्रतिष्ठान सील, 109 दुकानें बंद, व्यापारियों ने जताया रोष, मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा

Aug 31, 2026 - 22:39
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भोपाल में सीलिंग अभियान को लेकर बवाल: 7 प्रतिष्ठान सील, 109 दुकानें बंद, व्यापारियों ने जताया रोष, मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा

भोपाल। 

नगर निगम द्वारा आवासीय क्षेत्रों में चल रहे अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे सीलिंग अभियान ने सोमवार को शहर में हंगामे की स्थिति पैदा कर दी। प्रशासन की ओर से कई इलाकों में सुबह 9 बजे से शाम तक बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई, जिसके चलते व्यापारियों में भारी रोष देखा गया।

कहां-कहां हुई कार्रवाई और कितनी दुकानें सील?

नगर निगम की टीम ने सोमवार को रचना नगर स्थित जुंबा डांस हाउस को सील किया। इसके अलावा, लॉस लॉन सिस्टम गोडाउन, होटल एंड गुड फूड, अरेरा कॉलोनी स्थित कुनबी समाज कॉम्प्लेक्स और कोलार रोड स्थित राधिका पैलेस होटल को बलपूर्वक सील किया गया। कुल मिलाकर प्रशासन की कार्रवाई में 7 प्रतिष्ठानों को सील किया गया, जबकि 109 दुकानदारों ने प्रशासनिक डर के चलते स्वेच्छा से अपनी दुकानें बंद कर दीं।

कार्रवाई का दायरा कोलार रोड, अरेरा कॉलोनी, सुभाषनगर, मिसरोद, रचना नगर, गौतम नगर समेत कई इलाकों में रहा। कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर के सामने नोटरी और वकील के चैंबर भी हटाए गए।

अरेरा कॉलोनी में जमकर विरोध, 'भेदभाव' का आरोप

अरेरा कॉलोनी स्थित आर्य समाज के मंदिर के पास कार्रवाई के दौरान दुकानदारों ने जमकर हंगामा किया। दुकानदारों ने आरोप लगाया कि नगर निगम सिर्फ छोटे कारोबारियों को निशाना बना रहा है, जबकि बिल्डिंग के ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर पर चल रहे बड़े प्रतिष्ठानों को छोड़ दिया जा रहा है। विरोध के बावजूद नगर निगम का अमला आगे बढ़ता गया और अधिकारी कुछ भी कहने से बचते हुए नजर आए। इलाके में तनाव की स्थिति को देखते हुए मिसरोद, हबीबगंज, रातीबड़, कोहरेफिजा, गोविंदपुरा, ऐशबाग और कोलार पुलिस थानों की बल तैनात की गई।

'व्यापारी गलत नहीं, सरकार की कमी ने बनाई स्थिति'

10 नंबर मार्केट व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष आनंद सोनी ने इस कार्रवाई को गलत बताते हुए कहा, "व्यापारी गलत नहीं है, सरकार की कमी की वजह से ऐसा हो रहा है। अगर सरकार समय पर भोपाल का मास्टर प्लान लेकर आती तो यह समस्या खड़ी नहीं होती। सीलिंग की कार्रवाई से भोपाल का 90 प्रतिशत व्यापार बंद हो जाएगा।" उन्होंने मांग की कि सरकार जल्द मास्टर प्लान लाए या मिक्स लैंड यूज की व्यवस्था करे।

व्यापारियों का कहना है कि सोमवार की कार्रवाई से 10 नंबर मार्केट वीरान हो गया है और उनके सामने रोने जैसी स्थिति बन गई है।

मांगों की सूची: व्यापारियों ने मास्टर प्लान लागू करने, रिहायशी क्षेत्रों में मिक्स लैंड यूज की अनुमति देने, गुजरात की तर्ज पर अवैध विकास नियमितीकरण कानून 2022 लागू करने और त्योहारों को देखते हुए तुरंत राहत देने की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश और हाईकोर्ट का स्टे ऑर्डर

यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद की गई है, जिसमें आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण को लेकर सख्ती बरतने को कहा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए कहा था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दुकान संचालकों को मिले सभी राहत आदेशों (स्टे ऑर्डर) को निरस्त कर दिया था।

अगली सुनवाई 15 सितंबर को: मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी, जिसमें नगर निगम को अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करनी है। इस बीच, रहवासी विवेक त्रिपाठी ने मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की बात कही है। उनका आरोप है कि निगम छोटे कारोबारियों पर शिकंजा कस रहा है जबकि बड़े रसूखदारों को बख्शा जा रहा है।

रिहायशी क्षेत्रों में व्यापार पर रोक क्यों?

रहवासियों का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में चल रहे व्यावसायिक कार्यों से न सिर्फ शोर और भीड़ बढ़ी है, बल्कि सार्वजनिक शांति भंग होने के साथ-साथ सुरक्षा के खतरे भी बढ़े हैं। ट्रैफिक की समस्या के चलते स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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