शपथ पत्र में गलत जानकारी छिपाने का आरोप, ओबीसी महासभा ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
भोपाल।
ओबीसी महासभा के भोपाल जिलाध्यक्ष शैलेश सेन ने वार्ड 31 से भाजपा पार्षद श्रीमती बृजुला सचान के खिलाफ राज्य निर्वाचन आयोग में दिए गए शपथ पत्र में कथित तौर पर मिथ्या एवं असत्य जानकारी छिपाने का आरोप लगाया है। सेन का दावा है कि मामले की जांच में बृजुला सचान को दोषी पाया गया है, इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग को समय पर स्पष्ट जवाब नहीं भेजा जा रहा है।
शैलेश सेन ने आरोप लगाया कि एसडीएम और जिला निर्वाचन अधिकारी स्तर से पत्राचार को बार-बार इधर-उधर भेजे जाने के कारण मामले में कार्रवाई लंबित है। उनके मुताबिक राज्य निर्वाचन आयोग ने जांच प्रतिवेदन के आधार पर कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, भोपाल का अभिमत मांगा था।
सेन का आरोप है कि कलेक्टर के अभिमत के माध्यम से जवाब भेजने के बजाय संबंधित पत्र को अन्य स्तरों पर भेज दिया गया। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने दोबारा पत्र भेजकर स्पष्ट किया कि जवाब कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी के अभिमत के साथ भेजा जाना है। इसके बावजूद अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
ओबीसी महासभा जिलाध्यक्ष ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया से ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली के कारण बृजुला सचान को राहत देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने राज्य निर्वाचन आयोग से मामले में निष्पक्ष कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है।
सेन ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब राज्य निर्वाचन आयोग कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी से अभिमत मांग चुका है, तो संबंधित पत्र कलेक्टर तक पहुंचाने में इतनी देरी क्यों हो रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “ऐसा लगता है कि भोपाल में कलेक्टर साहब ही नहीं हैं।”
हालांकि, शैलेश सेन द्वारा लगाए गए आरोपों पर संबंधित अधिकारियों अथवा श्रीमती बृजुला सचान का पक्ष इस वक्त सामने नहीं आया है।
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