गेहूं कांड में दूसरा पक्ष सामने आया, व्यापारी ने दस्तावेज दिखाकर दी सफाई
शमशाबाद। शमशाबाद और सिरोंज में गेहूं से भरे दो ट्रकों पर प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अब मामले में दूसरा पक्ष सामने आया है। शमशाबाद गल्ला मंडी के व्यापारी मनु माहेश्वरी ने मीडिया के सामने दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए गेहूं को सरकारी बताए जाने पर सवाल उठाए हैं। व्यापारी का दावा है कि गेहूं इसी वर्ष शमशाबाद मंडी में किसानों से खरीदा गया था और खरीद से संबंधित दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं।
दो ट्रकों पर हुई थी कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, 18 अगस्त को सिरोंज प्रशासन ने सरकारी बारदाने के टैग लगी करीब 580 बोरियों से भरा ट्रक पकड़ा था। इसके अगले दिन 19 अगस्त को शमशाबाद मंडी से करीब 600 बोरी गेहूं से भरा एक अन्य ट्रक भी पकड़ा गया। दोनों मामलों में संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर की कार्रवाई की गई है।
वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन की डिमांड पर भेजा था गेहूं
व्यापारी मनु माहेश्वरी ने बताया कि मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन की शमशाबाद शाखा प्रबंधक वंदना बघेल की डिमांड पर मंडी से खरीदा गया गेहूं कुरवाई भेजा गया था। उनके अनुसार, कुरवाई में सैंपल में मिट्टी पाए जाने के बाद गेहूं को ग्रेडिंग और सफाई के लिए सिरोंज भेजा गया। इसी दौरान प्रशासन ने गेहूं को सरकारी मानते हुए कार्रवाई की।
माहेश्वरी का कहना है कि बोरियों पर 2022-23 के टैग जरूर लगे हैं, लेकिन ये पुरानी बोरियां हैं और बाजार में उपलब्ध हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनका पक्ष सुने बिना एकतरफा कार्रवाई की। उन्होंने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
नगर परिषद अध्यक्ष ने आरोपों को बताया निराधार
नगर परिषद शमशाबाद की अध्यक्ष भारती माहेश्वरी ने अपने बेटे मनु माहेश्वरी पर लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि कुछ लोग राजनीतिक कारणों से उन्हें और उनके परिवार को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने मामले को गलत तरीके से प्रचारित किए जाने का आरोप लगाया है।
शाखा प्रबंधक ने भी रखा अपना पक्ष
वहीं, मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन की शाखा प्रबंधक वंदना बघेल ने भी कार्रवाई को एकतरफा बताया है। उनका कहना है कि उनकी डिमांड पर गेहूं कुरवाई भेजा गया था और इस संबंध में उन्होंने 16 अगस्त को ही वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दे दी थी।
जांच के बाद साफ होगी गेहूं की वास्तविक स्थिति
फिलहाल व्यापारी द्वारा पेश किए गए दस्तावेज, शाखा प्रबंधक के बयान और प्रशासन की कार्रवाई के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अब निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जब्त गेहूं की वास्तविक स्थिति क्या थी और उसमें सरकारी बारदाने के टैग लगे होने की परिस्थितियां क्या थीं।
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