मध्यप्रदेश में सरकारी फाइलों पर अब नहीं चलेगी अफसरों की मनमानी, नई व्यवस्था से तय होगी समय-सीमा
भोपाल। मध्यप्रदेश में सरकारी कामकाज को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। ‘मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026’ के तहत ऐसी डिजिटल व्यवस्था लागू की जा रही है, जिससे अधिकारियों के स्तर पर फाइलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने की गुंजाइश कम होगी।
नई व्यवस्था के तहत सरकारी दफ्तरों में फाइलों को एक अधिकारी की टेबल पर लंबे समय तक रोककर रखने के बजाय ऑनलाइन ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होने पर सिस्टम फाइल को स्वतः वरिष्ठ अधिकारी के स्तर पर भेज देगा।
समय-सीमा खत्म होते ही होगा ऑटो एस्केलेशन
नई व्यवस्था की सबसे अहम विशेषता ‘ऑटो एस्केलेशन’ बताई गई है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी छोटे या मध्यम स्तर के अधिकारी को किसी फाइल पर 15 दिन के भीतर निर्णय लेना है और वह निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं करता, तो 16वें दिन फाइल उसके कंप्यूटर से स्वतः वरिष्ठ अधिकारी के डिजिटल डेस्क पर पहुंच जाएगी।
इस प्रक्रिया के बाद संबंधित अधिकारी के पास फाइल को अपने स्तर पर रोकने या मंजूर-नामंजूर करने का अधिकार नहीं रहेगा। साथ ही देरी का रिकॉर्ड भी डिजिटल सिस्टम में दर्ज होगा।
‘टेबल-टेबल’ घूमने वाली व्यवस्था पर लगेगी रोक
अब तक व्यापारियों और निवेशकों को एनओसी या अन्य मंजूरियों के लिए अलग-अलग सरकारी दफ्तरों और अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते थे। कई बार फाइलें एक ही टेबल पर लंबे समय तक अटकी रहती थीं।
नई व्यवस्था का उद्देश्य इस प्रक्रिया को ऑनलाइन और समयबद्ध बनाना है। इससे उद्योग एवं व्यापार से जुड़े मामलों में निर्णय प्रक्रिया तेज होने और अनावश्यक देरी कम होने की उम्मीद है।
वरिष्ठ अधिकारी के स्तर पर पहुंचेगी लंबित फाइल
व्यवस्था के तहत यदि कोई अधिकारी निर्धारित समय सीमा में फाइल का निपटारा नहीं करता है, तो मामला स्वतः उच्चतर प्राधिकारी के पास पहुंच जाएगा। इससे जवाबदेही तय करने में भी मदद मिलेगी और फाइल रोककर रखने की प्रवृत्ति पर अंकुश लग सकेगा।
सरकार की इस पहल को सरकारी कामकाज में डिजिटल पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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