जंगल के बीच आस्था का केंद्र बांधवाधीश मंदिर, जन्माष्टमी पर गूंजे जयकारे; रखरखाव को लेकर विधायक ने उठाई आवाज

Sep 5, 2026 - 16:32
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जंगल के बीच आस्था का केंद्र बांधवाधीश मंदिर, जन्माष्टमी पर गूंजे जयकारे; रखरखाव को लेकर विधायक ने उठाई आवाज

उमरिया।

 बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की घनी हरियाली, पहाड़ियों और ऐतिहासिक विरासत के बीच स्थित भगवान बांधवाधीश मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। भगवान के दर्शन के लिए श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। मंदिर में दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित रही। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग एवं प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी मुस्तैदी से ड्यूटी पर तैनात रहे। मंदिर परिसर में स्वच्छता, अनुशासन और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी पर्याप्त इंतजाम किए गए।

जन्माष्टमी के पावन अवसर पर सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह ने सबसे पहले भगवान बांधवाधीश की पूजा-अर्चना कर दर्शन किए। उन्होंने विधि-विधान से पूजा की और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और मीडिया से चर्चा की।

चार साल से नहीं हुई मंदिर की पुताई

मीडिया से बातचीत के दौरान विधायक दिव्यराज सिंह ने मंदिर के रखरखाव को लेकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पहले भगवान बांधवाधीश मंदिर की समय-समय पर पुताई कराई जाती थी, लेकिन पिछले करीब चार वर्षों से प्रशासन द्वारा मंदिर की पुताई तक नहीं कराई गई है।

विधायक ने कहा कि बांधवाधीश मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि बांधवगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल की नियमित देखरेख होना चाहिए। उन्होंने मीडिया के माध्यम से प्रशासन से मांग की कि मंदिर की पुताई कार्य भी कराए जाएं।

रामायण काल से जुड़ी है बांधवगढ़ की मान्यता

बांधवगढ़ का इतिहास प्राचीन मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। स्थानीय मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम ने बांधवगढ़ का किला अपने भाई लक्ष्मण को प्रदान किया था। इसी कारण इसे ‘बांधवगढ़’ नाम मिलने की बात कही जाती है। किले में स्थित भगवान बांधवाधीश मंदिर इसी धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

जन्माष्टमी के दिन भगवान बांधवाधीश की विशेष पूजा-अर्चना मंदिर की धार्मिक महत्ता को और बढ़ा देती है। प्राकृतिक सौंदर्य और प्राचीन विरासत के बीच स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का विशेष केंद्र है।

एक ओर जन्माष्टमी पर मंदिर में सुरक्षा और दर्शन की व्यवस्थाएं बेहतर नजर आईं, वहीं चार वर्षों से पुताई नहीं होने का मुद्दा भी सामने आया। विधायक की मांग के बाद अब श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। उम्मीद है कि ऐतिहासिक मंदिर के रखरखाव और सौंदर्यीकरण को लेकर जल्द कदम उठाए जाएंगे।

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