जातिगत जनगणना का मौजूदा प्रारूप त्रुटिपूर्ण, मोदी सरकार की नीयत पर उठाए सवाल
भोपाल। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य एवं उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने भोपाल स्थित मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय में आयोजित एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे गंभीर कमियों से भरा करार देते हुए मोदी सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए।
अजय कुमार लल्लू ने कहा कि जातिगत जनगणना देश के करोड़ों पिछड़े, दलित, आदिवासी एवं वंचित वर्गों के सामाजिक न्याय और अधिकारों से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है। यदि इसके आंकड़े ही त्रुटिपूर्ण होंगे, तो सामाजिक न्याय का पूरा आधार ही कमजोर पड़ जाएगा। कांग्रेस ने मांग की है कि वर्तमान प्रश्नावली को तत्काल रद्द कर नई पारदर्शी प्रश्नावली तैयार की जाए और तेलंगाना तथा बिहार की तर्ज पर जातियों की ड्रॉपडाउन सूची का उपयोग किया जाए।
ओपन-एंडेड व्यवस्था से पैदा होगी भारी विसंगति
लल्लू ने बताया कि आगामी जनगणना की प्रश्नावली में प्रश्न संख्या 10 के तहत जाति दर्ज करने के लिए ‘ओपन-एंडेड’ व्यवस्था अपनाई गई है। इसमें नागरिक द्वारा बताई गई जाति या उपजाति को गणनाकर्मी उसी रूप में दर्ज करेगा। उन्होंने चेताया कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में एक ही जाति के कई क्षेत्रीय नाम, उपनाम और वर्तनी (स्पेलिंग) होती हैं, जिससे आंकड़ों में भारी विसंगति उत्पन्न होगी। SECC-2011 में भी इसी व्यवस्था के कारण 46 लाख से अधिक प्रविष्टियां सामने आई थीं, जिससे सबक लेने में सरकार नाकाम रही है।
OBC समुदाय के अस्तित्व और अधिकारों पर संकट
कांग्रेस नेता ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि प्रश्नावली में पिछड़ा वर्ग शब्द का स्पष्ट उल्लेख न होना इस वर्ग की वास्तविक आबादी और सामाजिक-आर्थिक स्थिति को छुपाने की कोशिश लगती है। जब तक सही संख्या सामने नहीं आएगी, तब तक “जितनी आबादी, उतना हक” के सिद्धांत के तहत आरक्षण, शिक्षा, रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं में न्यायसंगत हिस्सेदारी मिलना संभव नहीं होगा।
सरकार की कथनी और करनी में विरोधाभास
उन्होंने सवाल उठाया कि जब केंद्र और राज्यों के पास लगभग 4,200 जातियों की प्रमाणित सूचियां उपलब्ध हैं और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के पास OBC जातियों का डेटा मौजूद है, तो सरकार ड्रॉपडाउन सूची का प्रयोग क्यों नहीं कर रही? उन्होंने याद दिलाया कि 2021 में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में खुद शिक्षा मंत्रालय ने माना था कि जातिगत जनगणना के लिए ड्रॉपडाउन सूची जरूरी है, फिर भी सरकार आज अपनी ही बात से पीछे हट रही है।
कांग्रेस की मुख्य मांगें:
* वर्तमान त्रुटिपूर्ण प्रश्नावली को तुरंत रद्द किया जाए।
* तेलंगाना और बिहार के मॉडल का अध्ययन कर राष्ट्रीय स्तर पर ड्रॉपडाउन सूची लागू हो।
* नई प्रश्नावली तैयार करने से पहले सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों से व्यापक विचार-विमर्श किया जाए।
* सटीक, पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से आंकड़ों का एकत्रीकरण सुनिश्चित हो।
पत्रकार वार्ता में पिछड़ा वर्ग कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष पवन पटेल, पूर्व प्रदेश प्रवक्ता अवनीश बुंदेला, आनंद जाट, प्रवीण धौलपुरे, अभिनव बरोलिया, फिरोज सिद्दीकी एवं राहुल राज सहित कई प्रमुख कांग्रेस पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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