अलमारी के बारकोड ने खोला राज, करोड़ों की नकदी मामले में रिटायर्ड इंजीनियर समेत 4 पर FIR
सागर। तिली तिगड्डा क्षेत्र में ड्राइवर के मकान से बरामद 3 करोड़ 2 लाख 12 हजार रुपये की नकदी के हाई-प्रोफाइल मामले में लोकायुक्त ने बड़ी कार्रवाई की है। जिला पुलिस के प्रतिवेदन के आधार पर भोपाल पीडब्ल्यूडी के सेवानिवृत्त इंजीनियर रमेश कुमार अहिरवार, उनकी पत्नी सहोद्रा बाई, ड्राइवर सौरभ अहिरवार और उसके भाई अंकित अहिरवार के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
लोकायुक्त ने बरामद नकदी के साथ उस अलमारी को भी अपने कब्जे में लिया है, जिसमें नोटों से भरे बैग मिले थे। मामले की जांच डीएसपी के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम करेगी।
गोदरेज अलमारी के बारकोड से जुड़ा इंजीनियर का कनेक्शन
पुलिस की जांच में अलमारी पर लगे बारकोड ने मामले की अहम कड़ी जोड़ दी। 16 अगस्त को अवैध हथियार की सूचना पर गोपालगंज पुलिस ने दबिश दी थी। कार्रवाई के दौरान मकान में रखी गोदरेज कंपनी की अलमारी से नोटों से भरे बैग बरामद हुए थे।
एसपी अनुराग सुजानिया के निर्देश पर कोतवाली थाना प्रभारी मनीष सिंघल ने अलमारी के बारकोड के आधार पर गुजराती बाजार स्थित गोदरेज आउटलेट का पता लगाया। शोरूम से मिले बिल के मुताबिक अलमारी अक्टूबर 2025 में 34 हजार रुपये में खरीदी गई थी और बिल रिटायर्ड इंजीनियर की पत्नी सहोद्रा बाई के नाम पर था।
पुलिस के मुताबिक यह दस्तावेज मामले में अहम सबूत माना जा रहा है। इससे पहले इंजीनियर ने बरामद रकम से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया था।
बैंक ट्रांजेक्शन ने भी बढ़ाया संदेह
जांच के दौरान रचना बाई की बुजुर्ग मौसी श्यामा बाई के बैंक खाते में अक्टूबर 2025 में इंजीनियर रमेश कुमार अहिरवार की ओर से 50 हजार रुपये के लेनदेन की जानकारी भी सामने आई है। श्यामा बाई शनीचरी वार्ड में रहती हैं, लेकिन अधिकांश समय रचना बाई के मकान में रहने की बात सामने आई है।
पुलिस इस लेनदेन समेत अन्य कड़ियों को भी जांच में शामिल कर रही है।
गड्डियों में कम मिले नोट, रकम पर उठे सवाल
बरामद रकम 3 करोड़ 2 लाख 12 हजार रुपये होने के कारण भी मामला चर्चा में है। कार्रवाई में शामिल अधिकारियों के अनुसार, 500-500 रुपये की कई गड्डियों में निर्धारित संख्या से कम नोट मिले। कुछ गड्डियों में 25 से 30 नोट तक कम बताए गए हैं, जबकि एक गड्डी में करीब 65-66 नोट ही मिले।
अब लोकायुक्त पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी रकम किसकी थी, इसे कहां से लाया गया और इसमें किन लोगों की भूमिका थी। मामले में रिश्वत या भ्रष्टाचार से जुड़े संभावित पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
लोकायुक्त की जांच पूरी होने के बाद ही नकदी के वास्तविक स्रोत और पूरे मामले में शामिल अन्य लोगों को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
What's Your Reaction?