जिला बदर आदेश रद्द, हाईकोर्ट ने प्रशासन की कार्रवाई पर उठाए सवाल
सिंगरौली/जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने बृजेश कुमार शाह उर्फ विन्देश के खिलाफ जारी जिला बदर के आदेश को रद्द कर दिया है। मामले में दायर रिट याचिका WP No. 15047/2026 पर सुनवाई करते हुए अदालत ने प्रशासनिक कार्रवाई के कानूनी आधार और उपलब्ध साक्ष्यों को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
याचिका में बृजेश शाह की ओर से तर्क दिया गया कि जिला बदर की कार्रवाई में पुराने मामलों को आधार बनाया गया, जबकि कई मामले पहले ही समाप्त हो चुके हैं। याचिका के अनुसार, तीन मामलों में उन्हें बरी किया जा चुका है, जबकि दो मामले लोक अदालत में आपसी सहमति से समाप्त हुए। अन्य मामलों में भी दोषसिद्धि नहीं हुई है।
गवाहों के भय को लेकर ठोस प्रमाण नहीं
याचिका में यह भी कहा गया कि जिला बदर की कार्रवाई के लिए यह दिखाना जरूरी है कि संबंधित व्यक्ति की गतिविधियों से कानून-व्यवस्था प्रभावित हो रही है और गवाह भय के कारण सामने नहीं आ रहे हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, प्रशासन की ओर से ऐसे आरोपों के समर्थन में पर्याप्त ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए गए।
मौलिक अधिकारों का भी मुद्दा उठाया
मामले में संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d) और अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को प्राप्त आवागमन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकारों का भी हवाला दिया गया। याचिका में कहा गया कि केवल पुराने मामलों या पर्याप्त आधार के अभाव में किसी व्यक्ति के इन अधिकारों को प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता।
अधिवक्ताओं ने रखा पक्ष
बृजेश शाह की ओर से अधिवक्ता अशोक कुमार शाह और ऐश्वर्या साहू ने अदालत में पक्ष रखा। याचिका में दावा किया गया कि वर्ष 2024 के बाद बृजेश शाह की किसी आपराधिक गतिविधि में संलिप्तता नहीं रही, इसके बावजूद उनके खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई की गई।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामले में प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े हुए हैं। अदालत के निर्णय ने यह स्पष्ट किया है कि जिला बदर जैसी कार्रवाई में वैधानिक प्रक्रिया और पर्याप्त साक्ष्यों का पालन महत्वपूर्ण है।
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