राशन दुकानों पर अब डिजिटल टोकन से मिलेगा खाद्यान्न, भोपाल-इंदौर से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट

Aug 6, 2026 - 11:20
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राशन दुकानों पर अब डिजिटल टोकन से मिलेगा खाद्यान्न, भोपाल-इंदौर से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट

पीडीएस में आएगा बड़ा बदलाव, सीबीडीसी के जरिए राशन वितरण की तैयारी

भोपाल। मध्यप्रदेश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को खाद्यान्न वितरण के लिए केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) आधारित व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। इसकी शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में भोपाल और इंदौर से होगी।

प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत के मुताबिक, दिसंबर 2026 तक भोपाल और इंदौर की सभी उचित मूल्य दुकानों पर इस व्यवस्था को लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।

मोबाइल वॉलेट में मिलेगा डिजिटल टोकन

नई व्यवस्था के तहत पात्र हितग्राहियों को उनकी मासिक खाद्यान्न पात्रता के अनुसार सीबीडीसी टोकन डिजिटल वॉलेट में भेजे जाएंगे। राशन प्राप्त करने के लिए हितग्राही को उचित मूल्य दुकान पर उपलब्ध क्यूआर कोड को मोबाइल ऐप से स्कैन करना होगा। इसके बाद टोकन का उपयोग कर पात्रता के अनुसार गेहूं, चावल सहित खाद्यान्न प्राप्त किया जा सकेगा।

सरकार का दावा है कि डिजिटल व्यवस्था से राशन वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी और खाद्यान्न की हेराफेरी, लीकेज तथा सब्सिडी के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

आधार और ई-केवायसी के बाद होगी प्रक्रिया

योजना लागू करने से पहले हितग्राहियों के आधार और राशन कार्ड के डेटा का मिलान, मोबाइल नंबर का सत्यापन और ई-केवायसी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद हितग्राहियों को पीएनबी डिजिटल रुपया मोबाइल ऐप पर ऑनबोर्ड किया जाएगा।

वहीं, उचित मूल्य दुकानों को क्यूआर आधारित सीबीडीसी भुगतान प्रणाली से जोड़ा जाएगा। राशन दुकानदारों को नई डिजिटल व्यवस्था के संचालन के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

कैशलेस और पेपरलेस होगी राशन वितरण व्यवस्था

इस पायलट प्रोजेक्ट को लेकर भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, मध्यप्रदेश खाद्य विभाग, पंजाब नेशनल बैंक, एनआईसी सहित संबंधित तकनीकी एजेंसियों के बीच बैठकें और वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई हैं। इनके आधार पर परियोजना की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है।

सरकार के मुताबिक, प्रयोग सफल रहा तो मध्यप्रदेश में इसे अन्य क्षेत्रों तक विस्तार देने की संभावना बढ़ेगी।

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