सहकारिता का मंत्र ‘मैं नहीं, हम’, नवाचार से व्यवस्था बदलें अधिकारी : नरेंद्र सिंह तोमर

Aug 6, 2026 - 11:14
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सहकारिता का मंत्र ‘मैं नहीं, हम’, नवाचार से व्यवस्था बदलें अधिकारी : नरेंद्र सिंह तोमर

विधानसभा अध्यक्ष ने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा- जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दें, पुलिस की पहचान भय नहीं भरोसे की हो

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने अधिकारियों से व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अधिकारी केवल नियमों का पालन कराने तक सीमित न रहें, बल्कि नवाचार के जरिए व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में काम करें।

तोमर बुधवार को विधानसभा परिसर में आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत भ्रमण पर आए सहकारिता, श्रम विभाग और उप पुलिस अधीक्षक स्तर के करीब 60 प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।

‘मैं नहीं, हम’ सहकारिता का मूल मंत्र

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सहकारिता केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि रोजगार, आत्मनिर्भरता और सामाजिक विकास का प्रभावी माध्यम है। इसका मूल मंत्र ‘मैं नहीं, हम’ है। उन्होंने गुजरात के सफल सहकारिता मॉडल और महिला सहकारी समितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश भी ऐसे प्रयोगों से सीख लेकर सहकारिता आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।

अमूल का उदाहरण देते हुए तोमर ने कहा कि गुणवत्ता, पारदर्शिता और सामूहिक प्रयासों के कारण यह देश का अग्रणी सहकारी ब्रांड बना है। इसी तरह मध्यप्रदेश में भी सहकारिता के माध्यम से रोजगार और विकास के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

श्रमिक हित और उद्योग विकास में संतुलन जरूरी

श्रम विभाग के अधिकारियों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि श्रमिकों के हितों की रक्षा और उद्योगों के विकास के बीच संतुलन जरूरी है। उद्योग और श्रमिक एक-दूसरे के पूरक हैं। उद्योग बढ़ेंगे तो रोजगार बढ़ेगा और रोजगार बढ़ने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

अपने केंद्रीय श्रम मंत्री के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए तोमर ने कहा कि यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) व्यवस्था के माध्यम से वर्षों से लंबित करीब 22 से 23 हजार करोड़ रुपये की कर्मचारी भविष्य निधि राशि श्रमिकों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई थी। उन्होंने अधिकारियों से श्रमिकों के शोषण को रोकने और कानूनों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

पुलिस की पहचान भय नहीं, भरोसे की हो

पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि बदलते समय के साथ अपराधों का स्वरूप भी बदल रहा है। ऐसे में पुलिस का दायित्व केवल कानून लागू करना नहीं, बल्कि जनता के मन में सुरक्षा और विश्वास का वातावरण तैयार करना भी है।

उन्होंने कहा कि पुलिस की पहचान भय की नहीं, बल्कि भरोसे की प्रतीक होनी चाहिए।

अधिकारियों से जनहित को प्राथमिकता देने का आह्वान

तोमर ने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि वे सही बात कहने का साहस रखें, व्यवस्था को मजबूत करें और जनता के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने विश्वास जताया कि अधिकारी ईमानदारी और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए मध्यप्रदेश को विकास और सुशासन के नए आयामों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

इस अवसर पर विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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