सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में भी ‘फर्जीवाड़ा’! 6 कॉलेजों में प्राचार्य नहीं, 10 में उप-प्राचार्य नदारद, हाईकोर्ट पहुंचा NSUI

Aug 23, 2026 - 16:27
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सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में भी ‘फर्जीवाड़ा’!  6 कॉलेजों में प्राचार्य नहीं, 10 में उप-प्राचार्य नदारद, हाईकोर्ट पहुंचा NSUI

भोपाल। मध्यप्रदेश में निजी नर्सिंग कॉलेजों की धांधली के बाद अब सरकारी नर्सिंग कॉलेजों की साख पर भी गहरा संकट मंडराने लगा है। सत्र 2026-27 की मान्यता प्रक्रिया में शासकीय कॉलेजों द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताओं और शैक्षणिक स्टाफ की भारी कमी का खुलासा हुआ है। इस मुद्दे को लेकर NSUI ने मोर्चा खोलते हुए मामले को हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंचा दिया है।

रविवार को राजधानी भोपाल में आयोजित पत्रकारवार्ता के दौरान कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी, NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार, अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और अधिवक्ता अंशुल तिवारी ने सरकार और मप्र नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए।

फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्रों का खेल

NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने आरोप लगाया कि सत्र 2026-27 की मान्यता के लिए आवेदन करने वाले 22 शासकीय कॉलेजों में से 3 की मान्यता निरस्त कर दी गई है। इनमें भोपाल स्थित BMHRC नर्सिंग कॉलेज, अमरकंटक विश्वविद्यालय अनूपपुर और दतिया का शासकीय नर्सिंग कॉलेज शामिल हैं।

परमार ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि 6 शासकीय कॉलेजों में प्राचार्य और 10 में उप-प्राचार्य के पद पूरी तरह खाली हैं। इतना ही नहीं, मान्यता हासिल करने के लिए कूटरचित व फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र पेश किए गए। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि:

 * BMHRC भोपाल: असिस्टेंट प्रोफेसर को सीधे उप-प्राचार्य और उप-प्राचार्य को एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर दर्शा दिया गया।

 * अमरकंटक विश्वविद्यालय: जो कॉलेज अभी शुरू भी नहीं हुआ है, वहां प्राचार्य के पास 1.5 वर्ष और उप-प्राचार्य के पास 3 वर्ष का अनुभव दिखाया गया है।

हाईकोर्ट में याचिका दायर, सीबीआई जांच के बाद भी बेपरवाही

मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय ने बताया कि मध्यप्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों में पूर्व में हुई सीबीआई जांच के बावजूद लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने कमियों को दूर नहीं किया। बिना योग्य फैकल्टी के छात्रों का प्रशिक्षण अधूरा है, इसलिए दोषियों की जवाबदेही तय करने और कार्रवाई की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है।

अधिवक्ता अंशुल तिवारी के अनुसार, मान्यता नियम 2018 के तहत 30 सीटों के लिए कम से कम 1 प्राचार्य, 1 उप-प्राचार्य, 2 एसोसिएट प्रोफेसर और 3 असिस्टेंट प्रोफेसर या ट्यूटर होना अनिवार्य है, जिसका सरकारी कॉलेजों में ही खुलकर उल्लंघन हो रहा है।

सड़क से न्यायालय तक आंदोलन की चेतावनी

NSUI नेताओं ने स्पष्ट किया कि नर्सिंग शिक्षा सीधे आम जनता के स्वास्थ्य और हजारों छात्रों के भविष्य से जुड़ी है। यदि सरकार ने इन अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच कराकर त्वरित सुधार नहीं किया, तो संगठन छात्रों के हित में चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा।

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