गुजरात जहरीली शराब कांड: मुख्य आरोपी उज्जैन से गिरफ्तार, मुरैना के 'डॉक्टर' ने बनाई थी जानलेवा शराब
गुजरात के भावनगर जिले के खरकड़ी गांव में जहरीली शराब पीने से 9 लोगों की मौत के मामले में गुजरात पुलिस ने मुख्य आरोपी रईस को मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार किया है। इस पूरे मामले में मुरैना निवासी नरेंद्र यादव उर्फ 'डॉक्टर' की भूमिका भी सामने आई है, जिसने यह जानलेवा शराब बनाई थी और खुद भी उसे पीकर अपनी जान गंवा बैठा।
शराब में क्या मिला था?
फॉरेंसिक जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जब्त किए गए शराब के नमूनों में 38.59% मिथाइल अल्कोहल (मेथनॉल) पाया गया, जबकि मात्र 0.94% इथाइल अल्कोहल (एथेनॉल) मौजूद था। मेथनॉल एक अत्यधिक जहरीला औद्योगिक रसायन है, जिसे कभी भी पीने योग्य शराब में नहीं मिलाया जाता। विशेषज्ञों के अनुसार, शराब बनाने की कोशिश के दौरान हुई गलती के कारण यह जानलेवा साबित हुआ।
कैसे बना यह नेटवर्क?
पुलिस जांच के अनुसार, गुजरात के स्थानीय तस्कर गौतम सोलंकी ने रईस से संपर्क किया। रईस, नरेंद्र की अवैध शराब बनाने में महारत से वाकिफ था, इसलिए उसने नरेंद्र को गुजरात बुलाया। तीनों ने मिलकर शराब बनाने की योजना बनाई।
पहले दो बैच बेकार हो गए, जिसके बाद तीसरे बैच में मेथनॉल का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि नरेंद्र और उसके साथियों की मौजूदगी में 25 पेटियां जहरीली शराब तैयार की गईं। विडंबना यह रही कि खुद नरेंद्र ने भी वही शराब पी ली और 17 अगस्त को उसकी मौत हो गई।
शव को लेकर विवाद
नरेंद्र के परिजन उसका शव गुजरात से बिना पोस्टमार्टम कराए मुरैना ले आए और दिल का दौरा पड़ने से मौत होने की बात कह रहे थे। गुजरात पुलिस ने शव वापस भेजने को कहा, लेकिन परिजनों के कड़े विरोध के बाद स्थानीय स्तर पर ही पोस्टमार्टम कराया गया।
पुराना इतिहास
गौरतलब है कि 10 जनवरी 2021 को मुरैना में ही जहरीली शराब पीने से 24 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। अब भावनगर कांड में नरेंद्र का नाम जुड़ने से मध्य प्रदेश और गुजरात के बीच फैले इस अवैध शराब नेटवर्क की जांच और संवेदनशील हो गई है।
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