भोपाल जिला पंचायत में नहीं हुई वन स्थायी समिति की बैठक, तीन घंटे इंतजार करते रहे जनप्रतिनिधि

Sep 3, 2026 - 17:15
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भोपाल जिला पंचायत में नहीं हुई वन स्थायी समिति की बैठक, तीन घंटे इंतजार करते रहे जनप्रतिनिधि

दोपहर 3 बजे बैठक का था समय, शाम 6 बजे तक नहीं पहुंचे वन विभाग के अधिकारी; समिति सदस्य ने जताई नाराजगी

भोपाल। भोपाल जिला पंचायत में बुधवार को वन स्थायी समिति की प्रस्तावित बैठक अधिकारियों के नहीं पहुंचने के कारण नहीं हो सकी। बैठक का समय दोपहर 3 बजे निर्धारित किया गया था, लेकिन शाम 6 बजे तक वन विभाग का एक भी अधिकारी जिला पंचायत के मीटिंग हॉल में नहीं पहुंचा। इससे समिति सदस्यों में नाराजगी देखने को मिली।

समिति सदस्य विनय मेहर बैठक में शामिल होने के लिए समय पर जिला पंचायत पहुंचे और काफी देर तक अधिकारियों का इंतजार करते रहे। उनका कहना है कि बैठक निरस्त किए जाने की जानकारी उन्हें पहले से नहीं दी गई। बिना जनप्रतिनिधियों को सूचना दिए बैठक निरस्त करना उचित नहीं है।

साल में एक बैठक पर भी उठे सवाल

विनय मेहर ने कहा कि वन स्थायी समिति की बैठक वर्ष में केवल एक बार ही हो पाती है, जबकि नियमों के अनुसार साल में चार से पांच बैठकें होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कई बार आग्रह के बाद वन विभाग के अधिकारियों द्वारा बुधवार को बैठक निर्धारित की गई थी। इसी आधार पर वे बैठक में शामिल होने जिला पंचायत पहुंचे, लेकिन वहां कोई अधिकारी मौजूद नहीं था।

डीएफओ से जताई आपत्ति, कलेक्टर से शिकायत की तैयारी

बैठक नहीं होने को लेकर समिति सदस्य ने डीएफओ लोकप्रिय भारती से भी आपत्ति जताई। मेहर ने आरोप लगाया कि वन विभाग की ओर से बैठक आयोजित करने के लिए पत्र जारी किया गया था, लेकिन बैठक निरस्त किए जाने की सूचना न तो लिखित रूप से दी गई और न ही मौखिक तौर पर उन्हें बताया गया।

उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की शिकायत कलेक्टर से की जाएगी। जनप्रतिनिधि ने सवाल उठाया कि यदि बैठक निरस्त की गई थी तो समिति सदस्यों को समय रहते इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई।

सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर जताई नाराजगी

बैठक नहीं होने से नाराज समिति सदस्य विनय मेहर ने सोशल मीडिया पर वीडियो भी जारी किया। वीडियो में उन्होंने कहा कि वे घर से अपना लंच लेकर आए हैं और बैठक के लिए इंतजार करने के बाद यही भोजन करेंगे। उन्होंने दोहराया कि बैठक निरस्त होने की कोई सूचना उन्हें नहीं दी गई थी।

अब देखना होगा कि इस मामले में जिला प्रशासन और वन विभाग की ओर से क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है और वन स्थायी समिति की बैठक दोबारा कब आयोजित की जाती है।

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