बालाघाट में सर्राफा व्यापारियों से लूट का खुलासा, अंतरराज्यीय ऐरागोल्ला गैंग के 3 सदस्य गिरफ्तार
22 लाख रुपये के सोने-चांदी के आभूषण जब्त, 5 राज्यों के 21 जिलों में 65 दिन तक चली तलाश; 14 पुलिस टीमों ने तय किए 22,270 किलोमीटर
भोपाल,
। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में सर्राफा व्यापारियों से लूट की दो वारदातों का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने अंतरराज्यीय ‘ऐरागोल्ला गैंग’ के तीन सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से करीब 22 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण जब्त किए हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने पांच राज्यों के 21 जिलों में 65 दिनों तक सघन तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और मैदानी सूचनाओं के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई गई।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने अपनी पहचान छिपाने और डिजिटल निशान से बचने के लिए कई तरीके अपनाए थे। इसके बावजूद पुलिस की 14 टीमों ने लगातार कार्रवाई करते हुए करीब 22,270 किलोमीटर की यात्रा की। जांच के दौरान 6,24,588 टेलीफोन रिकॉर्ड का तकनीकी विश्लेषण किया गया और 300 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले गए।
65 दिनों तक चला अंतरराज्यीय अभियान
पुलिस अधीक्षक बालाघाट के निर्देशन में गठित विशेष टीमों ने 5 अगस्त से 8 अक्टूबर 2026 तक लगातार कार्रवाई की। इस दौरान मध्यप्रदेश सहित पांच राज्यों के 21 जिलों में आरोपियों की तलाश की गई। अभियान में 76 पुलिसकर्मियों ने कुल 149 दिवस मैदानी कार्य किया।
पुलिस टीमों ने करीब 190 लोगों से पूछताछ की। इसके अलावा विभिन्न राज्यों की छह जेलों में बंद आरोपियों से भी पूछताछ कर महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई गईं। तकनीकी जांच और मैदानी सूचनाओं को आपस में जोड़कर पुलिस ने आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाया।
रेकी कर सर्राफा व्यापारियों को बनाया निशाना
पुलिस के मुताबिक, लूट की पहली वारदात 5 अगस्त 2026 को बालाघाट जिले के किरनापुर थाना क्षेत्र के रजेगांव में हुई थी। एक सर्राफा व्यापारी दुकान बंद करने के बाद सोने-चांदी के आभूषणों और अन्य सामान से भरे दो बैग लेकर घर जा रहा था। इसी दौरान मोटरसाइकिल सवार बदमाशों ने रास्ता रोककर दोनों बैग लूट लिए।
दूसरी वारदात 28 अगस्त 2026 को लांजी थाना क्षेत्र में हुई। यहां भी सर्राफा व्यापारी दुकान बंद कर आभूषण और नकदी लेकर घर जा रहा था। रास्ते में आरोपियों ने उसकी मोटरसाइकिल रोककर मारपीट की और आभूषण व नकदी से भरे दोनों थैले लूटकर फरार हो गए।
सीसीटीवी फुटेज और टेलीफोन रिकॉर्ड से मिले सुराग
दोनों घटनाओं के बाद पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। इसके बाद रजेगांव से रायपुर और ओडिशा के संबलपुर सहित महासमुंद क्षेत्र तक विभिन्न स्थानों के कैमरों के फुटेज का समय के अनुसार मिलान किया गया।
साइबर सेल ने घटनास्थल और संभावित मार्गों से जुड़े बड़ी संख्या में मोबाइल नंबरों की तकनीकी जांच की। संदिग्ध नंबरों की गतिविधियों, सोशल मीडिया और अन्य उपलब्ध सूचनाओं का विश्लेषण कर पुलिस टीमों को आवश्यक इनपुट दिए गए।
इन साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा में दबिश देकर गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने बालाघाट की दोनों लूट की वारदातों में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। उनसे ओडिशा और अन्य राज्यों में हुई इसी तरह की वारदातों के संबंध में भी पूछताछ की जा रही है।
पहचान छिपाने के लिए बदलते थे कपड़े और मोटरसाइकिल
जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य सर्राफा व्यापारियों की गतिविधियों की पहले से रेकी करते थे। वारदात को अंजाम देने के लिए बिना नंबर प्लेट वाली मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल किया जाता था। पहचान छिपाने के लिए आरोपी हेलमेट पहनते, कपड़े बदलते और रास्ते में मोटरसाइकिल भी बदल लेते थे। वारदात के बाद वे तत्काल सुरक्षित और दूरस्थ स्थानों की ओर निकल जाते थे।
पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य डिजिटल पहचान से बचने के लिए व्यक्तिगत सिम कार्ड और नियमित मोबाइल हैंडसेट का सीमित इस्तेमाल करते थे। इस कारण उनकी पहचान और आवाजाही का पता लगाना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण रहा।
करीब 22 लाख रुपये के आभूषण जब्त
पुलिस ने दोनों वारदातों में लूटे गए करीब 22 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण आरोपियों के कब्जे से जब्त किए हैं। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह की अन्य संभावित वारदातों और नेटवर्क के संबंध में जानकारी जुटा रही है।
बालाघाट पुलिस की इस कार्रवाई में तकनीकी विश्लेषण, सीसीटीवी फुटेज, टेलीफोन रिकॉर्ड और अंतरराज्यीय समन्वय की अहम भूमिका रही। पुलिस का कहना है कि संगठित अपराधों के मामलों में आरोपियों की गतिविधियों, संपर्कों और नेटवर्क का तकनीकी व मैदानी स्तर पर विश्लेषण कर कार्रवाई की जा रही है।
What's Your Reaction?