सरकारी स्कूलों को बचाने भोपाल में जुटे हजारों छात्र, शिक्षक और अभिभावक
भोपाल,
मध्य प्रदेश के हजारों सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने के विरोध और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर भोपाल के नीलम पार्क में रविवार को विशाल कन्वेंशन आयोजित किया गया। स्कूल बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के 36 जिलों से छात्र, शिक्षक और अभिभावक बड़ी संख्या में शामिल हुए। जेन जी और जेन अल्फा के छात्रों के साथ शिक्षकों व अभिभावकों ने सरकारी स्कूलों को बंद नहीं करने की मांग उठाई।
स्कूल बंद करने की नीति का विरोध
कन्वेंशन में सरकारी स्कूलों के क्लोजर और मर्जर का विरोध करते हुए जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत, आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने और शिक्षकों की पर्याप्त संख्या सुनिश्चित करने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने TET की अनिवार्यता को लेकर भी आपत्ति जताई।
स्कूल बचाओ संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक मुदित भटनागर ने आरोप लगाया कि सरकारी शिक्षण संस्थानों के बजट में कटौती के कारण स्कूलों की स्थिति खराब हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई सरकारी स्कूल वर्षों से मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं। बारिश के दौरान कई स्कूलों में छतों से पानी टपकने और भवनों की जर्जर स्थिति की शिकायतें सामने आती हैं।
उज्जैन में स्कूल बंद करने के फैसले का विरोध
संघर्ष समिति के उज्जैन प्रभारी एडवोकेट जितेंद्र सेंगर ने कहा कि क्लोजर और मर्जर नीति के तहत उज्जैन के 11 स्कूलों को बंद करने के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने दावा किया कि दाऊदखेड़ी गांव स्थित सांदीपनि स्कूल में कन्या विद्यालय के मर्जर के विरोध में छात्रों और अभिभावकों ने आंदोलन किया था, जिसके बाद प्रशासन को मांग पर विचार करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि अशोकनगर, गुना, देवास और इंदौर सहित कई जिलों में भी स्कूल बचाने के लिए आंदोलन किए गए हैं। उनका कहना था कि क्लोजर, मर्जर, एक शाला-एक परिसर अथवा किसी अन्य योजना के नाम पर किसी भी सरकारी स्कूल को बंद नहीं किया जाना चाहिए।
सरकारी स्कूलों की संख्या घटने पर जताई चिंता
कन्वेंशन में डॉ. रामावतार शर्मा ने UDISE के आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकारी स्कूलों की संख्या में कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि स्कूलों के बंद होने और उनकी दूरी बढ़ने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। उन्होंने सरकारी स्कूलों को मजबूत करने और बच्चों को उनके नजदीक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की मांग की।
शिक्षकों की संख्या कम करने का भी विरोध
कन्वेंशन में TET परीक्षा के माध्यम से शिक्षकों की संख्या कम किए जाने की आशंका जताते हुए पर्याप्त शिक्षकों की भर्ती की मांग की गई। साथ ही विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निंदा करते हुए स्वच्छ, निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई गई।
कार्यक्रम को शिक्षक परमानंद डहेरिया, केंद्रीय कर्मचारी नेता यशवंत पुरोहित, समाजसेवी शशिभूषण यादव, शिक्षा बचाओ समिति के सुरेंद्र रघुवंशी, समाजसेवी माया विश्वकर्मा सहित विभिन्न शिक्षक एवं अभिभावक संगठनों के प्रतिनिधियों और अलग-अलग जिलों से आए छात्रों ने संबोधित किया।
ये हैं प्रमुख मांगें
सरकारी स्कूलों को बंद करने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए।
जर्जर सरकारी स्कूल भवनों की तत्काल मरम्मत कराई जाए।
स्कूलों के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया जाए।
सभी स्कूलों में आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की पर्याप्त संख्या सुनिश्चित की जाए।
परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया जाए।
What's Your Reaction?