27% ओबीसी आरक्षण की बहाली के लिए सड़कों पर उतरी ओबीसी महासभा
प्रदेशभर में ज्ञापन सौंपकर नए अध्यादेश की मांग
28 अक्टूबर को संभाग स्तर पर प्रदर्शन और नवंबर में भोपाल में विशाल जनआंदोलन का ऐलान
भोपाल।
मध्यप्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण की बहाली, 13% होल्ड से प्रभावित अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने और ओबीसी वर्ग के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की मांग को लेकर ओबीसी महासभा ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महासभा के प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन के तहत प्रदेश के सभी जिलों में उग्र धरना-प्रदर्शन किए गए और प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से ज्ञापन सौंपे गए।
ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि हालिया उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद उत्पन्न संवैधानिक व कानूनी पेचिदगियों को दूर करने के लिए विशेषज्ञ समिति या आयोग का गठन किया जाए। साथ ही, प्रासंगिक आंकड़ों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करवाकर पर्याप्त व विश्वसनीय क्वांटिफाएबल डेटा (संख्यात्मक आंकड़े) जुटाया जाए और नया अध्यादेश लाकर उसे स्थायी कानून का रूप दिया जाए।
ज्ञापन में रखी गई ये मुख्य मांगें:
* सर्वोच्च न्यायालय में पैरवी: पूर्ण 27% ओबीसी आरक्षण की बहाली के लिए सुप्रीम कोर्ट में ठोस तथ्यों के साथ प्रभावी पैरवी की जाए।
* 13% होल्ड अभ्यर्थियों को राहत: होल्ड से प्रभावित अभ्यर्थियों के हित में सर्वोच्च न्यायालय से तत्काल अंतरिम राहत हासिल करने के लिए आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएं।
* क्वांटिफाएबल डेटा व नया अध्यादेश: वैज्ञानिक सर्वेक्षण से डेटा एकत्रित कर नया अध्यादेश लाया जाए जो कानूनी कसौटी पर खरा उतरे।
* बैकलॉग पदों पर भर्ती: लंबित बैकलॉग पदों को शीघ्र भरकर अभ्यर्थियों के भविष्य को सुरक्षित किया जाए।
नवंबर में भोपाल में दिखेगा जनसैलाब
ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य लोकेंद्र गुर्जर ने बताया कि आंदोलन के प्रथम चरण के बाद अब दूसरे चरण में 28 अक्टूबर 2026 को सभी संभागीय मुख्यालयों पर प्रदर्शन किए जाएंगे। इसके बाद नवंबर माह में राजधानी भोपाल में प्रदेशभर से लाखों लोगों की भागीदारी के साथ एक ऐतिहासिक जनआंदोलन आयोजित किया जाएगा।
लोकेंद्र गुर्जर ने कहा, "27% आरक्षण का मुद्दा केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य और सामाजिक न्याय से जुड़ा विषय है। अब हमें खोखले आश्वासनों पर भरोसा नहीं है, सरकार को संवैधानिक प्रक्रिया पूरी कर ठोस परिणाम देने होंगे।" उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक 27% ओबीसी आरक्षण का मजबूत कानूनी समाधान नहीं निकल जाता, तब तक संगठन का संघर्ष शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक ढंग से जारी रहेगा।
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