ट्रांसफर का ‘मोहबल’: 20 दिन बाद भी कुर्सी से चिपके खाद्य विभाग के अधिकारी, रिलीव करने में कलेक्टर ऑफिस के छूटे पसीने!
रिपोर्ट---- मनीष श्रीवास्तव
10 अक्टूबर को जारी हुए थे तबादला आदेश, 20 दिन बाद भी भोपाल कलेक्ट्रेट में जमाए हैं ढेरा
किसी ने ली ‘अचानक’ मेडिकल लीव तो कोई संघ चुनाव की आड़ में बना रहा स्टे की जुगाड़
प्रमोशन के बाद जिला बदलना तय, फिर भी नियम-कायदों को ठेंगे पर रख भोपाल में ही टिके रहने की होड़
अफसरों का टालमटोल: एडीएम बोले- 'टूर पर हूँ', फूड कमिश्नर ने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा
भोपाल।
राजधानी के खाद्य विभाग और कलेक्टर कार्यालय में प्रशासनिक अनुशासन की धज्जियां उड़ रही हैं। 10 अक्टूबर को खाद्य विभाग में पदस्थ जिन तीन अधिकारियों के तबादला आदेश जारी किए गए थे, वे 20 दिन बीत जाने के बाद भी भोपाल कलेक्टर कार्यालय में ही अपनी ड्यूटी बजा रहे हैं। न तो जिला प्रशासन ने उन्हें अब तक रिलीव करने की जहमत उठाई और न ही ये अधिकारी अपनी नई पदस्थापना वाली जगह जाने को तैयार हैं। प्रशासनिक सर्जरी और कलेक्टर कार्यालय की कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कोई ‘बीमार’ तो कोई हार के बाद भी एप्रोच में व्यस्त!
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, तबादला रुकवाने के लिए अधिकारियों ने नए-नए हथकंडे अपना रखे हैं:
मेडिकल का खेल: सहायक खाद्य आपूर्ति अधिकारी (ASO) कुसुम अहिरवार तबादले का आदेश आते ही बिना कार्यालय को कोई पूर्व सूचना दिए छुट्टी पर चली गईं। हैरानी की बात यह है कि कथित बीमारी के कारण छुट्टी पर चल रहीं कुसुम अहिरवार हाल ही में आयोजित हुए खाद्य विभाग संघ के चुनाव में वोट डालने के लिए एकदम ‘तंदुरुस्त’ होकर कलेक्ट्रेट पहुंची थीं!
चुनाव की आड़ और हार का झटका: एक अन्य अधिकारी संघ के चुनाव का हवाला देकर भोपाल में ही जमे रहे। बताया जा रहा है कि वे अध्यक्ष पद के उम्मीदवार थे और चुनाव जीतकर भोपाल में पदस्थ रहने का प्लान बना रहे थे। हालांकि, 25 अक्टूबर को हुए चुनाव में उन्हें 70 से 80 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। हारने के बाद भी वे शीर्ष स्तर पर राजनीतिक और प्रशासनिक एप्रोच लगाकर भोपाल में ही ड्यूटी करने की जुगाड़ में लगे हुए हैं।
प्रमोशन मिला फिर भी भोपाल का मोह नहीं छूट रहा
नियमानुसार, जब किसी अधिकारी की पदोन्नति होती है, तो उसका जिला बदलकर ट्रांसफर किया जाता है। भोपाल से ट्रांसफर हुए अधिकारियों में संदीप भार्गव और कुसुम अहिरवार को प्रमोशन देकर 'जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी' बनाया गया है। इसके बावजूद दोनों अधिकारी स्टे लेने या ऊपर से दबाव बनवाकर अपना ट्रांसफर रुकवाने की जोर-आमाइश कर रहे हैं।
कर्मचारियों की कमी का झूठा बहाना!
विभाग में बैठे कुछ जिम्मेदार अधिकारी यह तर्क दे रहे हैं कि अमले की कमी के कारण इन्हें रिलीव नहीं किया जा रहा है। लेकिन विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो यह बहाना पूरी तरह खोखला साबित होता है:
भोपाल में स्वीकृत पद और मौजूदा स्थिति:
नियम के अनुसार स्वीकृत पद: भोपाल खाद्य विभाग में केवल 4 सहायक खाद्य आपूर्ति अधिकारियों (ASO) की नियुक्ति का नियम है।
वर्तमान स्थिति: तबादला पाने वाले अधिकारियों को मिलाकर फिलहाल भोपाल में 8 ASO पदस्थ हैं!
तबादले के बाद भी पर्याप्त अमला: यदि ट्रांसफर हुए 3 अधिकारियों को तुरंत रिलीव कर भी दिया जाए, तब भी भोपाल में 5 ASO पदस्थ रहेंगे (1 मूल ASO, 2 पदोन्नत ASO और 1 ट्रांसफर होकर भोपाल आए ASO)। यानी रिलीव करने के बाद भी स्वीकृत संख्या से एक अधिकारी ज्यादा ही रहेगा। इसके बावजूद 'कमी' का बहाना बनाकर फाइल दबाई जा रही है।
जिम्मेदारों का टालमटोल वाला रवैया
तबादले की फाइल भोपाल कलेक्टर से होते हुए एडीएम प्रकाश नायक के टेबल पर पहुंच चुकी है, लेकिन अभी तक रिलीविंग के लिखित आदेश जारी नहीं किए गए हैं।
एडीएम प्रकाश नायक: जब इस पूरे मामले पर एडीएम प्रकाश नायक से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, "मैं अभी टूर पर हूँ, मैंने फाइल नहीं देखी है।" जब उनसे पूछा गया कि फाइल आपके ऑफिस आ चुकी है, तो उन्होंने 'जन विश्वास योजना' का हवाला देकर मामले को टाल दिया।
फूड कमिश्नर: मामले में खाद्य आयुक्त (फूड कमिश्नर) का पक्ष जानने के लिए जब संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना ही उचित नहीं समझा।
हिंदुस्तान मेल के तीखे सवाल:
20 दिन बीत जाने के बाद भी कलेक्टर कार्यालय और खाद्य विभाग इन अधिकारियों को रिलीव क्यों नहीं कर रहा?
क्या राजधानी का खाद्य विभाग नियमों और सरकारी आदेशों से ऊपर उठकर काम कर रहा है?
जो अधिकारी मेडिकल छुट्टी का बहाना बनाकर रिलीव नहीं हो रहे, वे संघ के चुनाव में वोट डालने के लिए अचानक तंदुरुस्त कैसे हो गए?
सरकारी महकमे में जारी यह 'जुगाड़ तंत्र' अब आम चर्चा का विषय बन चुका है। देखना यह होगा कि भोपाल कलेक्टर इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हैं या तबादला पा चुके अफसर यूं ही मलाईदार कुर्सी पर काबिज रहेंगे!
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