एंबुलेंस का इंतजार करती रही प्रसूता, पिकअप बनी सहारा; अस्पताल के गेट पर भी नहीं मिले कर्मचारी

Sep 14, 2026 - 22:09
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एंबुलेंस का इंतजार करती रही प्रसूता,  पिकअप बनी सहारा; अस्पताल के गेट पर भी नहीं मिले कर्मचारी

रिपोर्ट-----आकाश नामदेव

उमरिया। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत दिखाता एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। मामला बरतराई गांव की एक प्रसूता से जुड़ा है, जिसे अस्पताल पहुंचने के लिए समय पर एंबुलेंस नहीं मिली। करीब एक घंटे तक इंतजार के बाद जब एंबुलेंस नहीं पहुंची तो परिजनों ने मजबूरी में पिकअप वाहन का सहारा लिया और प्रसूता को करीब 15 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद भी उनकी परेशानी खत्म नहीं हुई।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में अस्पताल के गेट पर कर्मचारी की गैरमौजूदगी और परिजनों द्वारा प्रसूता को खुद वाहन से उतारकर अस्पताल के अंदर ले जाने की स्थिति दिखाई दे रही है। वीडियो कांग्रेस नेत्री एवं जनपद सदस्य रोशनी सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है। वीडियो सामने आने के बाद प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि मामला शनिवार का है। बरतराई गांव से जिला अस्पताल की दूरी करीब 15 किलोमीटर है। परिजनों के अनुसार प्रसूता को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस की जरूरत थी, लेकिन करीब एक घंटे तक इंतजार करने के बावजूद वाहन नहीं पहुंचा। परिजनों को बताया गया कि मानपुर से एंबुलेंस आने के बाद ही उसे गांव भेजा जाएगा। प्रसव जैसी संवेदनशील स्थिति में इंतजार बढ़ता गया तो परिजनों के सामने कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा और उन्होंने पिकअप वाहन की व्यवस्था की।

जिला अस्पताल पहुंचने पर भी व्यवस्था की तस्वीर कुछ अलग नहीं दिखी। वायरल वीडियो में गेट पर कर्मचारी नजर नहीं आने पर परिजनों को खुद प्रसूता को वाहन से उतारकर स्टेचर की मदद से अंदर ले जाते देखा जा सकता है। सवाल यही है कि जिस व्यवस्था का उद्देश्य मरीज को मुश्किल समय में सहारा देना है, वहां एक प्रसूता के परिजनों को ही सारी जिम्मेदारी क्यों उठानी पड़ी?

सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

प्रदेश सरकार लगातार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे करती है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से सामने आने वाली ऐसी घटनाएं उन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती हैं। खासकर प्रसूता और नवजात से जुड़े मामलों में एंबुलेंस जैसी मूलभूत सुविधा का समय पर उपलब्ध होना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

मामले में सिविल सर्जन डॉ. केसी सोनी ने बताया कि वर्तमान में रेफर के मामले अधिक होने के कारण एंबुलेंस की कुछ परेशानी सामने आ रही है। उन्होंने बताया कि प्रसूता और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। अस्पताल के गेट पर कर्मचारी नहीं मिलने के मामले में संबंधित कर्मचारी को नोटिस देने और जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अब सवाल यह है कि एंबुलेंस की कमी या उपलब्धता में परेशानी का खामियाजा आखिर मरीज और उनके परिजन कब तक भुगतेंगे? वायरल वीडियो ने एक बार फिर उमरिया की स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ-साथ प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े दावों की जमीनी निगरानी की जरूरत को सामने ला दिया है।

इनका कहना है

प्रसूता के परिजनों के द्वारा एम्बुलेंस से संपर्क नहीं किया गया है। प्रतिवेदन बना कर भेज रहे है।

व्ही के सिंह चंदेल

सीएचएमओ,उमरिया

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