9 सितंबर से उमरिया में किसानों का बड़ा आंदोलन का ऐलान

Aug 26, 2026 - 18:04
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9 सितंबर से उमरिया में किसानों का बड़ा आंदोलन का ऐलान

उमरिया।

जिले में किसानों की नाराजगी अब आंदोलन की राह पर पहुंच गई है। भारतीय किसान संघ उमरिया ने प्रशासन पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए 9 सितंबर 2026 से घेरा डालो-डेरा डालो अनिश्चितकालीन महाआंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। संगठन ने साफ चेतावनी दी है कि मांगों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को जिलेभर में व्यापक रूप दिया जाएगा।

30 दिन का समय बीता, नहीं मिली राहत

भारतीय किसान संघ ने 21 जुलाई को जिला प्रशासन को किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा था। इस दौरान खासतौर पर पाली क्षेत्र में प्रस्तावित नई नौ निजी कोयला खदानों को लेकर किसानों की चिंताओं और आपत्तियों को प्रशासन के सामने रखा गया था।

संगठन के अनुसार, किसानों ने प्रशासन को समस्याओं के निराकरण के लिए 30 दिन का समय दिया था। निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी किसानों की मांगों पर कोई ठोस पहल नहीं होने से संगठन में नाराजगी बढ़ गई है।

खनिज क्षेत्र की बैठक से किसान बाहर

किसान संघ का आरोप है कि 25 अगस्त को कमिश्नर और कलेक्टर स्तर पर खनन गतिविधियों से संबंधित बैठक आयोजित की गई। बैठक में कई खदानों और संबंधित पक्षों से जुड़े लोगों की मौजूदगी रही, लेकिन किसानों की समस्याओं को लेकर न तो पर्याप्त चर्चा हुई और न ही प्रभावित किसानों को बैठक में शामिल किया गया।

संगठन का कहना है कि खनन परियोजनाओं का सीधा असर किसानों की जमीन, खेती और आजीविका पर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों को निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखना उनकी चिंताओं की अनदेखी है।

हाईवे बंद करने की चेतावनी

भारतीय किसान संघ ने 9 सितंबर से आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। संगठन के मुताबिक, पहले चरण में शहडोल-घुनघुटी राष्ट्रीय राजमार्ग को पूरी तरह बंद कर प्रदर्शन किया जाएगा।

किसान संघ ने कहा है कि यदि मांगों पर समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन रूप से आगे बढ़ाया जाएगा। इसके बाद उमरिया जिले की सातों तहसीलों में राजमार्गों पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। संगठन ने जिले के प्रमुख आवागमन मार्गों और रेल मार्गों पर भी आंदोलन की चेतावनी दी है।

फिलहाल किसानों के इस ऐलान के बाद जिला प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। अब नजर इस बात पर है कि 9 सितंबर से पहले प्रशासन किसानों से संवाद कर कोई रास्ता निकालता है या फिर आंदोलन सड़कों और राजमार्गों तक पहुंचता है।

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