करंट से भाजपा नेता की मौत का मामला, 500 मीटर में फैला खुले तारों का जाल
पुलिस को थी जानकारी और और नगर निगम को था शिकायत का इंतजार,
मासूम निगम प्रशासन को मेंटिनेंस का मतलब नहीं पता
भोपाल
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के एमपी नगर इलाके में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। डीबी मॉल के सामने रविवार रात करंट लगने से भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री दिव्यऋषि तिवारी की मौत हो गई। इस घटना ने शहर में विद्युत सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कैसे हुआ हादसा?
मॉल के सामने ऑटो चालक आशीष कुर्मी ने बताया कि उन्होंने हादसा होते देखा। दिव्यऋषि सड़क पार कर डिवाइडर तक पहुंचे और पोल छूते ही जोरदार करंट लगा, जिससे वे बेहोश होकर गिर गए। पीछे आ रही एक महिला ने मदद की कोशिश की तो उसे भी करंट लगा और वह तुरंत पीछे हट गई। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने दिव्यऋषि को सीपीआर दिया और अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं
मॉल कर्मचारी दिनेश ने खुलासा किया कि अगस्त में उन्हें भी इसी जगह करंट लगा था, जहां रविवार रात दिव्यऋषि ने पोल छुआ था। वे स्मार्ट पार्किंग में बाइक खड़ी करने के बाद इसी कट पॉइंट से आते-जाते थे। करंट लगने के बाद उन्होंने यह रास्ता छोड़ दिया, लेकिन पुलिस या नगर निगम में कोई शिकायत नहीं की।
एमपी नगर थाना प्रभारी के मुताबिक, इसी कट पॉइंट पर पिछले 3-4 दिनों में 7 से ज्यादा लोगों को करंट लगा था और इसकी शिकायत भी की गई थी। हालांकि, निगम का कहना है कि उसे ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली।
हादसे के बाद प्रशासनिक हरकत
हादसे के बाद पोल को ट्रिपाल से ढककर बैरिकेडिंग की गई और चेतावनी पोस्टर लगाए गए। सवाल यह है कि अगर पोल में खतरा था तो इसे हादसे से पहले क्यों नहीं पहचाना गया? पोल की वायरिंग सुरक्षित थी तो करंट कैसे आया और खराबी थी तो नियमित मेंटेनेंस में क्यों नहीं पकड़ी गई?
500 मीटर के दायरे में खुले तार-कनेक्शन
भास्कर की ग्राउंड पड़ताल में मेट्रो ब्रिज के नीचे करीब 500 मीटर के दायरे में कई स्ट्रीट लाइट पोल पर खुले तार और कनेक्शन मिले। इससे खतरा सिर्फ हादसे वाले पोल तक सीमित होने का सवाल भी उठता है। खराब इंसुलेशन, खुले कनेक्शन, अर्थिंग की समस्या या बारिश-पानी के संपर्क से करंट फैल सकता है। ऐसे में पूरे इलाके के स्ट्रीट लाइट पोल और वायरिंग का सुरक्षा ऑडिट जरूरी है।
पुलिस का दावा और निगम का इनकार
पुलिस का दावा है कि 3-4 दिनों में 7 से ज्यादा लोगों को करंट लगा था और शिकायत भी की गई थी। वहीं निगम का कहना है कि उसे कोई शिकायत नहीं मिली। अब सवाल है कि अगर पुलिस के पास शिकायत पहुंची थी तो वह किस विभाग को भेजी गई? क्या मौके पर जांच हुई? और अगर शिकायत निगम तक नहीं पहुंची तो वह कहां दर्ज हुई थी?
कमिश्नर का बयान
नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने कहा कि इलेक्ट्रिकल टीम को ऐसी शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई के निर्देश हैं। हालांकि, उन्होंने भी कहा कि हादसे से पहले इस पोल में करंट या किसी अन्य समस्या को लेकर निगम को कोई शिकायत नहीं मिली थी।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
भाजपा नेता की करंट से मौत के मामले में एमपी नगर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया है।
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सिर्फ पोस्टर और अस्थायी बैरिकेड से खतरा खत्म नहीं होगा; बिजली सप्लाई, वायरिंग, कनेक्शन और अर्थिंग की गहन जांच और नियमित सुरक्षा ऑडिट समय की मांग है।
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