SGTPS में ठेका-राज का पर्दाफाश! चहेतों के लिए नियम ताक पर, दूसरों के लिए जांच का फंदा?
बिरसिंहपुर पाली से बड़ा खुलासा
रिपोर्ट---- आकाश नामदेव
उमरिया/पाली ।प्रदेश के सबसे बड़े बिजली घर संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र (SGTPS) बिरसिंहपुर में इस वक्त कुछ ठीक नहीं चल रहा। बाहर से चमकता-दमकता बिजली केंद्र, अंदर से ठेका-नीति और सेटिंग-गेटिंग के गंभीर आरोपों में घिर गया है।
हिंदुस्तान मेल की पड़ताल में जो बातें सामने आई हैं, वो चौंकाने वाली हैं।*
*1. नया फॉर्मूला: काम पहले, कागज बाद में!*
सूत्रों का दावा है कि SGTPS में अब टेंडर प्रक्रिया उल्टी चल रही है। पहले चहेते ठेकेदार को फोन घुमाकर काम पर लगा दिया जाता है, और जब काम आधा हो जाता है, तब फाइलों में वर्क ऑर्डर और भुगतान की सेटिंग बैठाई जाती है। अगर ये सच है, तो ये सीधे-सीधे सरकारी खजाने की लूट है।
*2. जांच या टारगेटेड बदला?*
सबसे बड़ा सवाल जांच की नीयत पर खड़ा हो रहा है। कहा जा रहा है कि मिलते-जुलते कई ठेकों में गड़बड़ियां हैं, लेकिन स्टिंग और जांच की गाज सिर्फ चुनिंदा ठेकेदारों पर गिर रही है। बाकी चहेतों को क्लीन चिट? सवाल उठता है - क्या ये जांच सच उजागर करने के लिए है या किसी को बचाने और किसी को फंसाने के लिए?
*3. रिटायरमेंट से पहले फाइलों को निपटाने की हड़बड़ी!*
विभाग के गलियारों में चर्चा तेज है कि एक वरिष्ठ अधिकारी का रिटायरमेंट बेहद करीब है। ऐसे में क्या आनन-फानन में सालों की गड़बड़ियों पर पर्दा डालने की कोशिश हो रही है? क्या रिटायरमेंट से पहले सभी ठेकों का निष्पक्ष ऑडिट होगा, या रिटायरमेंट के साथ ही फाइलें हमेशा के लिए ठंडे बस्ते में दफन हो जाएंगी?
*जनता पूछ रही है हिसाब!*
SGTPS प्रबंधन की चुप्पी अब और भी सवाल खड़े कर रही है। जनता और ईमानदार कर्मचारी जानना चाहते हैं:
- किस ठेके का टेंडर कब निकला?
- वर्क ऑर्डर काम से पहले जारी हुआ या बाद में?
- काम की गुणवत्ता किसने जांची?
- भुगतान किस आधार पर हुआ?
जब तक प्रबंधन रिकॉर्ड के साथ सामने आकर जवाब नहीं देता, तब तक एक ही नारा गूंजेगा - *"SGTPS में अपनों पर मेहरबानी, गैरों पर सख्ती!"*
इस पूरे मामले पर प्रबंधन क्या सफाई देता है, ये देखना होगा।
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