बिजली ऑफिस के खंडहर में शाम ढलते ही अंधेरा कारोबार, कार्रवाई का इंतजार
रिपोर्ट--- आकाश नामदेव
उमरिया । बिजली विभाग के कर्मचारियों के लिए कभी बनाए गए सरकारी आवास आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। बिरसिंहपुर पाली नगर पालिका क्षेत्र स्थित बिजली ऑफिस परिसर में बने ये आवास अब खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। भवनों में न कर्मचारी रहते हैं और न ही इनका कोई उपयोग हो रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों के मुताबिक शाम ढलते ही यही सुनसान परिसर शराबखोरी और संदिग्ध गतिविधियों का ठिकाना बन जाता है।
दिन के उजाले में वीरान नजर आने वाले इन जर्जर भवनों में शाम होते ही आवाजाही बढ़ने की बात वार्डवासी बताते हैं। लोगों का कहना है कि भवनों की टूटती दीवारें और सुनसान माहौल असामाजिक तत्वों को मनमानी करने का मौका दे रहे हैं। आरोप है कि कुछ लोग यहां बैठकर शराब का सेवन करते हैं और देर रात तक संदिग्ध गतिविधियां चलती रहती हैं।
सरकारी संपत्ति या असामाजिक तत्वों का ठिकाना
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बिजली विभाग के इन आवासों का वर्षों से उपयोग नहीं हो रहा है तो इन्हें अब तक हटाया क्यों नहीं गया, सरकारी संपत्ति के नाम पर खड़े ये खंडहर अब सुरक्षा के लिहाज से भी चिंता का कारण बन रहे हैं। जर्जर भवन कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं। वहीं आसपास रहने वाले लोगों को बच्चों और परिवार के सदस्यों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है।
वार्डवासियों का कहना है कि खंडहर भवनों के कारण पूरा परिसर असुरक्षित महसूस होता है। यदि इन भवनों को नियमानुसार ध्वस्त कर जमीन को साफ कराया जाए तो न केवल हादसे का खतरा कम होगा, बल्कि यहां होने वाली कथित अवैध गतिविधियों पर भी रोक लगाई जा सकेगी।
शिकायतों के बाद भी कब जागेगा विभाग
स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या नई नहीं है। लंबे समय से अनुपयोगी पड़े इन भवनों की हालत लगातार खराब होती जा रही है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग की ओर से ठोस कदम उठता नजर नहीं आ रहा है। लोगों का सवाल है कि आखिर किसी सरकारी भवन को खंडहर बनने और उसके आसपास संदिग्ध गतिविधियां बढ़ने तक इंतजार क्यों किया जा रहा है।
वार्डवासियों ने मांग की है कि संबंधित अधिकारी मौके का निरीक्षण कर भवनों की वास्तविक स्थिति का आकलन करें और यदि वे उपयोग योग्य नहीं हैं तो नियमानुसार उन्हें ध्वस्त कराया जाए। साथ ही परिसर में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
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