अजाक्स अध्यक्ष पद को लेकर विवाद गहराया, कार्यालय के बाहर पुलिस ने की नाकेबंदी
जैन मंदिर चौराहे पर बैरिकेडिंग, भारी पुलिस बल तैनात; मुकेश मौर्य और संतोष वर्मा गुट के बीच वर्चस्व की जंग
भोपाल। मध्यप्रदेश अजाक्स (अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ) में प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर चल रहा विवाद रविवार को एक बार फिर सामने आ गया। विवाद की आशंका को देखते हुए भोपाल में अजाक्स कार्यालय के आसपास पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। जैन मंदिर चौराहे को चारों तरफ से बैरिकेडिंग कर बंद कर दिया गया, जिसके कारण क्षेत्र में आवाजाही भी प्रभावित रही।
अजाक्स कार्यालय की ओर जाने वाले रास्तों पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस द्वारा आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही है। स्थिति को देखते हुए पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में सुरक्षा व्यवस्था संभाली जा रही है।
अध्यक्ष पद को लेकर आमने-सामने दो गुट
अजाक्स में प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर लंबे समय से दो गुटों के बीच विवाद चल रहा है। एक गुट की ओर से चौधरी मुकेश मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष बताया जा रहा है, जबकि दूसरे गुट की ओर से आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा अपने अध्यक्ष होने का दावा कर रहे हैं।
दोनों पक्षों की ओर से संगठन के संविधान और बायलॉज का हवाला देते हुए एक-दूसरे के दावों पर सवाल उठाए जा चुके हैं। यही विवाद अब संगठन के कार्यक्रमों, पत्राचार और लेटरहेड के इस्तेमाल तक पहुंच गया है।
लेटरहेड और प्रस्तावित सम्मेलन को लेकर भी विवाद
उज्जैन में प्रस्तावित प्रांतीय सम्मेलन को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच मतभेद सामने आए हैं। मुकेश मौर्य गुट ने सम्मेलन को अनधिकृत बताते हुए आरोप लगाया है कि कुछ लोग अजाक्स के नाम, लेटरहेड और पदनाम का इस्तेमाल कर अधिकारियों, कर्मचारियों और समाज के लोगों को भ्रमित कर रहे हैं।
मौर्य गुट की ओर से ऐसे आयोजनों और गतिविधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। साथ ही सदस्यों से अपील की गई है कि वे संगठन के अधिकृत पदाधिकारियों द्वारा जारी सूचना और कार्यक्रमों पर ही भरोसा करें।
संतोष वर्मा ने मौर्य की वैधता पर उठाए सवाल
दूसरी ओर संतोष वर्मा ने मुकेश मौर्य के अध्यक्ष होने पर ही सवाल खड़े किए हैं। उनका दावा है कि अजाक्स के बायलॉज के अनुसार संगठन का अध्यक्ष आईएएस अधिकारी होना चाहिए। वर्मा का कहना है कि 23 नवंबर 2025 को निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें अध्यक्ष चुना गया था।
वर्मा ने संगठन के पूर्व अध्यक्षों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि 23 नवंबर 2025 तक जे.एन. कंसोटिया संगठन के अध्यक्ष थे। ऐसे में मुकेश मौर्य के वर्ष 2023 से अध्यक्ष होने के दावे पर भी उन्होंने सवाल उठाए हैं।
हाईकोर्ट में भी पहुंच चुका है मामला
अजाक्स अध्यक्ष संतोष वर्मा से जुड़े विवाद में जनहित याचिका भी हाईकोर्ट तक पहुंच चुकी है। याचिका में उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई और एफआईआर की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि अदालत जांच एजेंसी या नीति-निर्माता की भूमिका नहीं निभा सकती।
कार्यालय के बाहर तनाव, पुलिस ने संभाला मोर्चा
अध्यक्ष पद को लेकर दोनों गुटों के आमने-सामने होने और संभावित भीड़ की आशंका के बीच रविवार को पुलिस ने अजाक्स कार्यालय के आसपास सुरक्षा घेरा बढ़ा दिया। जैन मंदिर चौराहे पर बैरिकेडिंग के साथ पुलिस बल की तैनाती की गई।
फिलहाल पुलिस की मौजूदगी में स्थिति नियंत्रण में है। वहीं, अजाक्स में अध्यक्ष पद को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के चलते विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है।
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