विदिशा में 76 हजार हेक्टेयर में धान की फसल पर संकट, हलाली बांध से पानी छोड़ने की मांग

Oct 12, 2026 - 14:46
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विदिशा में 76 हजार हेक्टेयर में धान की फसल पर संकट, हलाली बांध से पानी छोड़ने की मांग

जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, बोले- कृषि कल्याण वर्ष में किसान सिंचाई के पानी के लिए परेशान

विदिशा। जिले में धान की फसल को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलने से नुकसान का संकट मंडरा रहा है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर हलाली बांध से नहरों के माध्यम से तत्काल पानी छोड़ने की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि जिले में 76 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में लगी धान की फसल पानी के अभाव में बर्बाद होने की कगार पर है।

पटवारी ने कहा कि भाजपा सरकार एक ओर कृषि कल्याण वर्ष मना रही है, वहीं दूसरी ओर किसान अपनी फसल बचाने के लिए सिंचाई के पानी की मांग कर रहे हैं। उन्होंने इसे सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर बताया।

चार तहसीलों में सामान्य से कम बारिश

पटवारी के मुताबिक, विदिशा तहसील में सामान्य से 29 प्रतिशत, गुलाबगंज में 42 प्रतिशत, कुरवाई में 31 प्रतिशत और शमशाबाद में 30 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। ऐसे में किसानों को धान की फसल बचाने के लिए हलाली बांध से नहरों के जरिए पानी मिलने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की मांग के बावजूद अब तक ठोस राहत नहीं मिली है।

बांध में पानी, फिर भी किसान परेशान

पटवारी ने पत्र में बताया कि हलाली बांध में 231.87 मिलियन घनमीटर पानी उपलब्ध है। बांध का वर्तमान जलस्तर 459.29 मीटर है, जबकि पूर्ण जलभराव स्तर 459.61 मीटर है। उन्होंने सवाल उठाया कि पर्याप्त जल उपलब्धता के बावजूद फसल बचाने के लिए समय पर निर्णय क्यों नहीं लिया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि विदिशा केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान का संसदीय क्षेत्र है। इसके बावजूद किसानों को सिंचाई के पानी के लिए मांग करनी पड़ रही है।

फसल नुकसान का सर्वे कराने की मांग

पटवारी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि हलाली बांध से पानी छोड़ने के संबंध में तकनीकी समीक्षा कर समयबद्ध निर्णय लिया जाए। नहरों की मरम्मत और रबी की सिंचाई जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। प्रभावित गांवों में फसल नुकसान का सर्वे कराकर पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा और राहत दी जाए। साथ ही जिला प्रशासन, सिंचाई विभाग और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

पटवारी ने कहा कि किसानों को राहत घोषणाओं से नहीं, बल्कि खेतों तक समय पर पानी पहुंचाने से मिलेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि समय रहते सिंचाई के लिए पानी नहीं मिला और फसल खराब हुई, तो इसकी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी।

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