संजय गांधी ताप विद्युत गृह फिर सवालों में, यूनिट-3 के तेल रिसाव ने खोली निगरानी व्यवस्था की पोल
रिपोर्ट-- आकाश नामदेव
*उमरिया।*
मध्यप्रदेश के सबसे बड़े विद्युत गृहों में शामिल *संजय गांधी ताप विद्युत गृह (SGTPP) बिरसिंहपुर पाली* एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह है बड़ी लापरवाही। *यूनिट नंबर-3 में हुए भारी तेल रिसाव (Oil Leakage)* ने प्लांट की निगरानी और मेंटेनेंस व्यवस्था की पोल खोल दी है। समय रहते रिसाव पर ध्यान न दिए जाने से बड़ा हादसा भी हो सकता था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यूनिट-3 में बीते दिनों अचानक टरबाइन एरिया के पास से तेल रिसाव शुरू हो गया। धीरे-धीरे रिसाव इतना बढ़ गया कि पूरी यूनिट को सुरक्षित रूप से बंद करना पड़ा। सूत्रों का कहना है कि यह रिसाव कोई अचानक हुई घटना नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रही *निगरानी में लापरवाही* का नतीजा है।
*मेंटेनेंस सिर्फ कागजों में?*
संजय गांधी ताप विद्युत गृह की यूनिटें पहले भी कई बार तकनीकी खामियों के कारण बंद हो चुकी हैं। 500 मेगावाट की यूनिट दो साल तक बंद रहने की आशंका वाली खबरों के बाद अब 210 मेगावाट वाली यूनिट-3 में तेल रिसाव ने प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि नियमित जांच और ऑयल प्रेशर मॉनिटरिंग सही से नहीं की जा रही है। अगर समय पर सेंसर अलार्म पर ध्यान दिया जाता तो रिसाव को शुरुआती स्टेज पर ही रोका जा सकता था।
*उत्पादन पर असर, बिजली संकट का खतरा*
यूनिट-3 के बंद होने से *210 मेगावाट बिजली उत्पादन ठप* हो गया है। इससे प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका है। प्लांट के मुख्य अभियंता ने तकनीकी टीम को तत्काल सुधार के निर्देश दिए हैं, लेकिन स्थानीय लोगों और कर्मचारी संगठनों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
गौरतलब है कि SGTPP में पहले भी सुरक्षा उपकरणों के अभाव में मजदूरों की मौत और ठेका श्रमिकों के शोषण जैसे मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में एक के बाद एक हो रही घटनाएं प्लांट की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा रही हैं।
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