मप्र में यूसीसी को लेकर विरोध तेज, शहर काजी ने सरकार से मांगी छूट
भोपाल।
मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक-2026 को लेकर विरोध तेज हो गया है। भोपाल के शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी ने सरकार से यूसीसी को वापस लेने या मुसलमानों को इसके दायरे से अलग करने की मांग की है.
शहर काजी का क्या कहना है?
शहर काजी ने कहा कि यूसीसी से मुस्लिम पर्सनल लॉ प्रभावित होता है और इससे मुसलमानों की धार्मिक एवं कानूनी आजादी पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय निकाह, विरासत, वसीयत और अन्य व्यक्तिगत मामलों में अपने पर्सनल लॉ का पालन करता आया है.
शहर काजी ने कहा, "यदि आदिवासी समुदाय को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है, तो मुस्लिम समुदाय को भी इससे बाहर रखा जाना चाहिए". उन्होंने इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और आतिफ अकील भी उनके साथ मौजूद रहे.
सड़क पर नहीं, कानूनी लड़ाई लड़ेंगे
शहर काजी ने साफ कहा कि वे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, "केवल नारे लगाने और सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। कानूनी मुद्दे का जवाब कानूनी तरीके से ही दिया जाना चाहिए।" उन्होंने समुदाय के लोगों से शरिया पर अमल करने की अपील भी की.
शहर मुफ्ती का भी विरोध
शहर मुफ्ती अब्दुल कलाम ने कहा कि मुस्लिम समुदाय इस्लामी कानून को ईश्वरीय कानून मानता है। उन्होंने कहा, "जिस देश में मुस्लिम रहते हैं, वहां के कानून का पालन तब तक किया जाता है, जब तक वह कुरान और हदीस के किसी आदेश से टकराव न करता हो।" उन्होंने निजी जिंदगी में किसी भी तरह की कानूनी दखलंदाजी को अनुचित बताया.
विधानसभा में क्या हुआ?
मध्यप्रदेश सरकार ने 20 जुलाई 2026 को विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश किया। कांग्रेस के हंगामे के बीच 21 जुलाई को बिल को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह कानून सभी नागरिकों को समान अधिकार देगा। उन्होंने कहा, "राम से रहीम, एंथोनी से अकबर तक - सभी अब एक ही संविधान द्वारा शासित होंगे". सीएम ने दावा किया कि 76 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं ने यूसीसी का समर्थन किया है.
विधेयक में बहुविवाह और निकाह हलाला को अपराध घोषित किया गया है, साथ ही लिव-इन रिलेशनशिप को अनिवार्य रूप से पंजीकृत कराने का प्रावधान है. आदिवासी समुदायों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है.
कांग्रेस का रुख
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने विधानसभा में संशोधन का प्रस्ताव रखा। उन्होंने मांग की कि जिन समुदायों के पारंपरिक अधिकार संविधान के अनुच्छेद 25 और 29 के तहत संरक्षित हैं, उन पर यूसीसी के प्रावधान लागू नहीं किए जाएं. मसूद ने आरोप लगाया कि बिल जल्दबा जी में लाया गया और इसे सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाना चाहिए.
आगे की राह
शहर काजी और मुस्लिम संगठनों ने साफ कर दिया है कि वे यूसीसी के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे. जमीयत उलेमा सहित कई मुस्लिम संगठनों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन देकर इस कानून पर पुनर्विचार की मांग की है. कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि मुस्लिम समाज हर जिले में प्रदर्शन करेगा और अदालत का दरवाजा खटखटाएगा.
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