लगातार कार्रवाइयों के बावजूद नहीं थम रही रिश्वतखोरी: चार माह में लोकायुक्त ने किए 91 ट्रैप
पांच साल के आंकड़ों में उतार-चढ़ाव जारी, सरकारी दफ्तरों से भ्रष्टाचार मिटाने की चुनौती बरकरार
भोपाल।
मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की ताबड़तोड़ कार्रवाई लगातार जारी है, लेकिन इसके बावजूद सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी पर लगाम लगाने की चुनौती जस की तस बनी हुई है। लोकायुक्त के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच प्रदेशभर में रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने के 91 ट्रैप प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इसका मतलब है कि इन चार महीनों में औसतन हर महीने 22 से अधिक मामलों में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है।
राजस्व से लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग तक के अधिकारी जद में
लोकायुक्त की इन छापों और कार्रवाइयों की चपेट में सिर्फ एक नहीं बल्कि कई प्रमुख विभाग आए हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
* राजस्व विभाग
* नगरीय प्रशासन विभाग
* वन विभाग
* सहकारिता विभाग
* महिला एवं बाल विकास विभाग
इन विभागों के कई अधिकारी और कर्मचारी रंगे हाथों घूस लेते पकड़े जा चुके हैं।
पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों का लेखा-जोखा
लोकायुक्त के आंकड़े बताते हैं कि ट्रैप प्रकरणों की संख्या में पिछले पांच वर्षों के दौरान लगातार उतार-चढ़ाव देखा गया है:
* वर्ष 2022-23 के दौरान कुल 238 मामले दर्ज किए गए थे।
* वर्ष 2023-24 में यह संख्या घटकर 162 पर आ गई थी।
* वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा फिर बढ़कर 215 हो गया।
* वर्ष 2025-26 में कुल 222 ट्रैप प्रकरण दर्ज किए गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन आंकड़ों से सीधे तौर पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि भ्रष्टाचार में कमी आई है या बढ़ोतरी हुई है। शिकायतों की कुल संख्या, सत्यापन की प्रक्रिया और विभागीय कार्रवाई की सक्रियता भी इन आंकड़ों को सीधे तौर पर प्रभावित करती है।
विभिन्न विभागों में हालिया बड़ी कार्रवाइयां
* अप्रैल: रायसेन जिले की उदयपुरा नगर परिषद के उपयंत्री को दो लाख रुपये की भारी-भरकम रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया था।
* जुलाई: राजगढ़ जिले के जीरापुर में एक सहायक समिति प्रबंधक के खिलाफ ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
* सितंबर: वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के दो कर्मचारी 90 हजार रुपये की रिश्वत लेते धरे गए। इसी महीने सागर में वन विभाग के एक रेंजर और लिपिक को 50 हजार रुपये की घूस लेते पकड़ा गया।
* अक्टूबर (शुरुआत): महीने की शुरुआत में ही महिला एवं बाल विकास विभाग के एक अकाउंटेंट के खिलाफ भी लोकायुक्त ने बड़ी कार्रवाई की।
(विशेष नोट: सितंबर और अक्टूबर महीने की ये घटनाएं अप्रैल से जुलाई के बीच के 91 मामलों की समयावधि से अलग हैं, इसलिए इन्हें इन चार महीनों के आंकड़ों में शामिल नहीं किया गया है.)
What's Your Reaction?