छात्रों से लेकर किसानों तक हर वर्ग परेशान, सरकार जवाबदेही से भागने के बजाय जनता के सवालों का जवाब दे: कुणाल चौधरी
भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस के सचिव कुणाल चौधरी ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए युवाओं, किसानों और आम जनता के मुद्दों को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की सफलता पर छात्र-छात्राओं और राहुल गांधी का आभार व्यक्त करते हुए चौधरी ने कहा कि राज्य का पढ़ा-लिखा युवा आज बेरोजगारी, पेपर लीक और भर्ती घोटालों से त्रस्त है।
पेपर लीक पीड़ितों को मिले मुआवजा, तय हो जवाबदेही
कुणाल चौधरी ने मांग की कि वर्षों मेहनत करने वाले जिन अभ्यर्थियों का भविष्य पेपर लीक और परीक्षा धांधलियों के कारण बर्बाद हुआ है, सरकार उन्हें मुआवजा दे। उन्होंने सवाल उठाया कि पेपर लीक को लेकर जवाबदेही तय करने वाला बोर्ड कब बनेगा? इसके साथ ही छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से मासूमों की मौत, सागर में जहरीली शराब कांड, ड्रग नेटवर्क और भागीरथपुरा मामले पर भी प्रशासनिक व राजनीतिक जवाबदेही तय करने की मांग की।
भोपाल के ‘90 डिग्री ब्रिज’ पर सरकार स्थिति साफ करे
राजधानी भोपाल के अधोसंरचनागत मुद्दों को उठाते हुए चौधरी ने पूछा कि बहुचर्चित ‘90 डिग्री ब्रिज’ पर सरकार अपनी स्थिति कब स्पष्ट करेगी? उन्होंने कहा कि जनता से जुड़े निर्माण कार्यों में लापरवाही पर सरकार चुप्पी साधे बैठी है।
‘एक बीघा में 12 क्विंटल सोयाबीन’ के दावे पर ₹1 लाख का चैलेंज
किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए चौधरी ने कहा कि बारिश और पीले मोजेक रोग से सोयाबीन की फसल तबाह हो चुकी है। एक बीघा में 12 क्विंटल सोयाबीन उत्पादन के दावों को उन्होंने पूरी तरह भ्रामक बताया। चौधरी ने खुला चैलेंज देते हुए कहा— "मध्यप्रदेश में एक बीघा में 12 क्विंटल सोयाबीन पैदा करने वाले किसी भी एक किसान को सामने लाकर दिखा दीजिए, मैं उसे ₹1 लाख का नकद इनाम दूंगा।"
MSP ₹5,700 लेकिन किसान कम दाम पर क्यों मजबूर?
उन्होंने कहा कि सरकार ₹5,700 प्रति क्विंटल MSP की बात करती है, लेकिन मंडियों में किसानों को लागत भी नहीं मिल रही। भावांतर योजना के नाम पर केवल वादे किए जा रहे हैं। फसल कटाई शुरू होने के बावजूद अभी तक नुकसान का सर्वे शुरू न होने पर भी उन्होंने सरकार को आड़े हाथों लिया।
‘नफरती चिंटू’ राजनीति छोड़ वास्तविक मुद्दों पर आएं भाजपा नेता
भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा पर सीधा हमला बोलते हुए चौधरी ने उन्हें "नफरती चिंटू" करार दिया और आरोप लगाया कि वे सस्ती लोकप्रियता के लिए समाज में नफरत फैलाने और असामाजिक तत्वों को संरक्षण देने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि सत्तापक्ष के नेताओं को विभाजनकारी राजनीति छोड़कर शिक्षा, रोजगार और जनहित के मुद्दों पर जवाब देना चाहिए।
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