अमरकंटक जूना अखाड़ा संत हत्याकांड: दादा अलबेले भोलगिरी खड़ेश्वरी महाराज के हत्यारे को उम्रकैद, कोर्ट ने दोषी वीरेंद्र खटेट को तत्काल भेजा जेल
अनूपपुर/अमरकंटक।
पवित्र तीर्थ नगरी अमरकंटक के जूना अखाड़ा संत हत्याकांड में आखिरकार न्याय की जीत हुई है। राजेंद्रग्राम अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए संत हत्यारे *वीरेंद्र सिंह खटेट को आजीवन कारावास* की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी पर *10,000 रुपये का अर्थदंड* भी लगाया गया है। कोर्ट ने सजा सुनाते ही दोषी को तत्काल जेल भेजने का आदेश दिया।
*क्या था पूरा मामला?*
यह सनसनीखेज हत्याकांड अमरकंटक के गढ़ीदादर, चचानडीह स्थित *शिवदावा आश्रम जूना अखाड़े* का है। यहां के प्रसिद्ध संत *दादा अलबेले भोलगिरी खड़ेश्वरी महाराज* की नृशंस हत्या कर दी गई थी। यह हत्या केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ उठी आवाज को दबाने की साजिश थी।
जांच में सामने आया कि संत द्वारा क्षेत्र में चल रही अनैतिक गतिविधियों - शराब, मांसाहार और महिलाओं के साथ अशोभनीय व्यवहार* का खुलकर विरोध किया जा रहा था। संत की यही सामाजिक सक्रियता आरोपी वीरेंद्र खटेट को नागवार गुजरी और रंजिश में उसने इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया।
*कोर्ट का कड़ा रुख, BNS 103(1) में दोषी करार*
मामले की सुनवाई *अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धनकुमार कड़ोपे* की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए वैज्ञानिक साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट, घटनास्थल के साक्ष्य और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी माना।
कोर्ट ने *भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1)* के तहत दोषसिद्धि करते हुए कहा कि अपराध की प्रकृति अत्यंत गंभीर और समाज विरोधी है, इसलिए किसी भी प्रकार की नरमी नहीं दी जा सकती। जुर्माना न चुकाने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
*फैसले से संत समाज में संतोष*
इस फैसले के बाद जूना अखाड़े के संतों और स्थानीय लोगों में न्यायपालिका के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है। लंबे समय से संत समाज इस मामले में कठोर सजा की मांग कर रहा था। कोर्ट के इस फैसले ने स्पष्ट संदेश दिया है कि धार्मिक नगरी में आस्था पर प्रहार करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
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